बराड़ा के बाजारों में अतिक्रमण पर नपा का कार्रवाई ना करना बना चर्चा का विषय
बराड़ा के बाजारों में अतिक्रमण पर नपा का कार्रवाई ना करना बना चर्चा का विषय
बराड़ा, (जयबीर राणा थंबड़)। बराड़ा के मुख्य बाजार में दुकानदारों द्वारा किए जा रहे अतिक्रमण के कारण राहगीरों और स्थानीय नागरिकों को कितनी परेशानियों का सामना करना पड़ता है, इस विषय पर कई बार मांग उठाने और खबरें प्रकाशित होने के बावजूद भी नगरपालिका प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई नहीं किया जाना जहां नपा प्रशासन को न्याय के कटघरे में खड़ा कर रहा है, वहीं कईं चर्चाओं को भी पैदा कर रहा है। रेलवे स्टेशन ‌से लेकर दोसड़का रोड पर ताई के पैट्रोल पम्प तक और राजोली रोड पर रेलवे फाटक तक कोई ऐसा दुकानदार नहीं जिसने अपनी दुकान के आगे सामान‌ रखकर सड़क पर अतिक्रमण न किया हो। इस अतिक्रमण के कारण बाजार में कितनी दुर्घटनाएं, झगड़े, मार-पीट और नुकसान हो चुका है इसकी गिनती करना तो मुश्किल है, परन्तु इस अतिक्रमण के कारण दुर्घटना में राहगीरों की मौत और भयंकर चोटें लगने व हाथ-पैर टूट जाने पर भी प्रशासन ने मुख्य बाजार से अतिक्रमण को जड़ से समाप्त करने में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। यहां तक कि दुकान के बाहर सामान रखने को लेकर दुकानदारों के हुए झगड़े में एक बुजुर्ग की मौत हो गई, परन्तु प्रशासन ने इस घटना को गंभीरता से नहीं लिया। नपा द्वारा बाजार से कभी-कभी अतिक्रमण हटाने के लिए ना-काबिल कार्रवाई की गई, परन्तु कुछ समय बाद समस्या ज्यों की त्यों ही रहती है।
लोगों का कहना है कि कुछ दुकानदारों ने तो अपनी दुकान के आगे टैंट लगाकर सड़क के किनारे तक कब्जा किया हुआ है और कुछ दुकानदार अपनी दुकान के आगे की जगह सब्जी, फल-फ्रूट बेचने वालों व अन्य कईं प्रकार की फड़ियां लगाने वालों को देकर रोजाना 400-500 रूपये किराया वसूल रहे हैं। परन्तु इन अतिक्रमणकारियों के कारण जहां जनता को परेशानी भुगतनी पड़ती है वहीं नपा पर नगर की व्यवस्था व सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मुख्य बाजार में बे-तरतीब से खड़े वाहन और सड़क पर हो रहे अवैध कब्जे  इस बात की गवाही नहीं देते कि बराड़ा में नगरपालिका है या कोई व्यवस्था का यहां पालन हो रहा है।

*बुद्धिजीवियों का मत है कि जिस तरह मुख्य बाजार में पशु अस्पताल की भूमि पर अवैध रूप से रखें खोखों को हटाने में प्रशासन पूरी तरह नकारा साबित हुआ है उसी प्रकार नपा भी बाजारों का अतिक्रमण हटाने में अपनी विफलता स्वीकार कर लें, ताकि कोई नगरवासी भविष्य में नपा से बाजारों का अतिक्रमण से मुक्ति की कोई उम्मीद न *रखें।