कागजों में ही सिमट कर रह गया है ग्रामीणों का डबरी का मजदूरी भुगतान...
कागजों में ही सिमट कर रह गया है ग्रामीणों का डबरी का मजदूरी भुगतान.

गावं के जनप्रतिनिधियों के लापरवाही भुगत रहे हैं वहां के आम ग्रामीण जनता...


जी हां आपको बता दें कि पूरा मामला छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिला के वाड्रफनगर विकासखंड के ग्राम पंचायत गुडरू के आश्रित ग्राम पंचायत चौपाता का है जहाँ ग्रामीणों के द्वारा किये गये कार्यों का मजदूरी भुगतान नहीं हुआ है अपने किये हुए कार्यों का मजदूरी भुगतान के आस में दर-दर भटकनें पर मजबूर हैं चौपाता ग्राम के ग्रामीण। आपको बता दें कि चौपाता ग्राम के ग्रामीणों के अनुसार सरपंच-सचिव व वहां के जनप्रतिनिधियों के द्वारा 1 साल पूर्व मनरेगा रोजगार गारंटी योजना के तहत डबरी निर्माण का कार्य गर्मी के दिनों में चौपाता ग्राम के ग्रामीणों के द्वारा किया गया था जिसमें कुछ ग्रामीणों का मजदूरी भुगतान आया भी है तो आधा-अधूरा और चौपाता ग्राम के आधा से अधिक ग्रामीणों का ढबरी निर्माण का मजदूर भुगतान अभी तक नहीं हुआ है...

जब हमने सरपंच महिला रजवंती सिंह जी से इस बारे में जानकारी लेने के लिए गए तो सरपंच जी कोई भी जानकारी देने से बचते हुए नजर आई। उन्होंने साफ-साफ बयान देने से इंकार कर दिया....

ग्राम चौपाता के ग्रामीण गांव के जनप्रतिनिधि सरपंच सचिव व बैंक के दरवाजो के चक्कर काटते-काटते मजबूर हो कर हातास हो चुके है...

 लेकिन इन मासूम ग्रामीणों को मिली तो केवल गांव के जनप्रतिनिधियों के द्वारा झूठे आश्वासन मासूम गरीब ग्रामीण करें भी तो करें क्या...

क्या ऐसे ही ग्रामीणों को लूटा जाएगा इनका शोषण किया जाएगा क्या उच्च अधिकारी-कर्मचारी कुछ जांच करके कार्यवाही करते हैं या नहीं... आखिर ग्रामीणों का डबरी का मजदूरी भुगतान रुका तो रुका कहां से यह तो जांच का विषय बनता है क्या उच्च अधिकारी इस पर कोई जांच टीम गठित करते हैं या नहीं यह तो देखने वाली बात रहेगी.... ? ?

या ऐसे ही कागजों के पन्नों में ही सिमटा रह जाएगा ग्रामीणों का मजदूरी भुगतान और कागजी लीपापोती करके मामले को दबा दिया जाएगा यह तो देखने वाली ही बात होगी। 

*संदीप कुशवाहा की रिपोर्ट*