अम्बाला के गांव में गायों की साहीवाल नस्ल को बढ़ावा देने के लिए खुला फार्म
अम्बाला के गांव में गायों की साहीवाल नस्ल को बढ़ावा देने के लिए खुला  फार्म

अम्बाला/साहा(जयबीर राणा थंबड़)आज विश्वदूध दिवस है अम्बाला में भी कई डेरी फार्म ऐसे हैं जो दूध उत्पादन को बढावा देने के लिए जी जान से प्रयासरत हैं अम्बाला छावनी के निकटवर्ती गांव तेपला में एक फार्म ऐसा भी है जो गायों की साहीवाल नस्ल को बढावा देने के लिए प्रयासरत है। संकल्प ऐग्रो एंड डेयरी फार्म के प्रबंधक कुलदीप कुमार ने बताया कि आज से कुछ वर्ष पहले अम्बाला छावनी के सुभाष कलोनी निवासी निटु बैल्जियम गये थे वहां उन्होने डेयरी फार्म के बाहर लिखा देखा। यह देखकर बडे हैरान हुए तब उन्हें बताया गया कि यहां पर एनडीआरआई से 80 गाय ली गई थी जिनकी संख्या 8 साल में 1300 पहुंच गई हेै। उन्होने इसी संक्ल्प के साथ अम्बाला के छोटे से गांव तेपला के पास साहीवाल नस्ल की देसी गाय का एक फार्म बना दिया जिसमें लगभग 1 करोड10 लाख की लागत से 200 गाय रखी गई। साहीवाल नस्ल की गायों पर हिसार यूनिवर्सिटी रिसर्च भी कर रही है प्रत्येक गाय 10 से लेकर 15 लीटर दूध देने मे सक्षम है इन देसी गायों के दूध से अनेक प्रकार की बिमारियां भी दूर हो रही हैं। उन्होंने ने बताया कि आज हिसार यूनिवर्सिटी से आई एक टीम ने निरीक्षण किया और यहां साहिवाल नस्ल की गायों को देखा उन्होंने बताया कि देसी गायों के  दूध की ओर लोगोें का रूझान पहले से बढा है लोागों को भी ज्ञात हो रहा है यह दूध काफी पौष्टिक है तथा मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए काफी लाभदायक है