परम पूजनीय सरसंघचालक जी श्री मोहन भागवत जी के अमूल्य विचार महामारी को परास्त करने के लिए ।
परम पूजनीय सरसंघचालक जी श्री मोहन भागवत जी के अमूल्य विचार महामारी को परास्त करने के लिए ।

१.सात्वंना देना -जिन भी परिवारों ने अपने सदस्यों को खोया है उनको अपना मानसिक संबल अत्यंत ऊंचा रखना होगा, क्योंकि सभी परिचित, और उनके निकटतम प्रियजन लोग इस अथाह दुख की घड़ी में उनको सांत्वना ही दे सकते हैं । लेकिन वह इस विकट दुख की स्थिति से अपने मन को मजबूत कर कर ही बाहर आ सकते हैं। परिस्थितियां निश्चित रूप से कठिन है लेकिन प्रयास भी उसी अनुरूप ही चाहिए ।

२.मन को "पाज़िटिव" रखना ही रखना है, और इसी से तन कोरोना "नेगेटिव" हो पायेगा।


३. मन को मजबूत रखना ही होगा, थककर ,हारकर बैठना नहीं है। निराशा की परिस्थिति का निर्माण मन में नहीं होने देना, बल्कि मन को लड़ने की परिस्थिति के लिए तैयार करना है, कि कैसे इस महामारी से लड़ाई जीते, खुद भी ,और अपने आसपास के लोगों को भी जिताने में जो बन सके वह करें ।


४. परिस्थितियां कठिन है, पर उसका सामना करना ही है,परम आदरणीय डॉ हेडगेवार जी के जीवन वृत का वृत्तांत , सरसंघचालक जी , उदाहरण स्वरूप सामने लाते हैं, कि अपने माता पिता को लगभग 100 साल पहले प्लेक महामारी में एक ही दिन में खोने के बाद,भी डॉक्टर साहब हारे नहीं, थके नहीं ,रुके नहीं, बल्कि अपनी आंतरिक मजबूती को अत्यंत उच्च शिखर पर रखते हुए उन्होंने इतना बड़ा  समाजोनुपयोगी संगठन का निर्माण किया।


५. पूजनीय सरसंघचालक जी ने चर्चिल का भी उदाहरण दिया जिन्होंने अपने ऑफिस के बाहर बोर्ड लगा रखा था कि हम निराशावादी नहीं है ,और हम सिर्फ जीत और सिर्फ जीत में ही विश्वास रखते हैं । सर संचालक जी ने कहा इस चुनौती से भी हम भारतीय जीतेंगे, मानवता जीतेगी और हम सब का संकल्प जीतेगा ।


६. एक समूह के रूप में कार्य करना है वर्ग भेद ,जाति भेद,और अन्य मानव निर्मित किसी भी तरह के भेदों को भूलकर त्वरीत गति से सामूहिक सामाजिक साझा प्रयास इस महामारी से लड़ने के लिए ,करें ।


७. संकल्प की दृढ़ता, धैर्य और सतत प्रयास ,सजगता से सक्रिय रहकर निरंतर प्रयास, जिसमें योग, ध्यान शारीरिक व्यायाम का मेल, और शुद्ध सात्विक उचित आहार करकर हम खुद भी इस बीमारी से बच सकते हैं और औरों को भी इससे बचने के लिए सजग कर सकते हैं ।


८. बेसिर पैर की बात( नकारात्मक बातें) ना खुद करनी है ना उसको आगे बढ़ावा देने के लिए हमें एक माध्यम बनना है ।


९. अपने आप को व्यस्त रखें, और देखें क्या रचनात्मक कार्य ,इस वक्त में, आज के समयानुकुल , सारे नियमों का पालन करते हुए,मैं कर सकता हूं । साथ ही उचित आहार ,उचित उपचार लेना ही है। 


१०. सजगता रखनी है ,साफ सफाई और हाइजीन का पूरा ध्यान रखना है, मास्क पहनने और सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन करना है और उसके बाद भी अगर उसके बाद भी कोरोनावायरस से पॉजिटिव हो जाए तो धैर्य नहीं खोना है ,इस बात को ना छुपा कर अपने आसपास के लोगों को बता कर, जल्द से जल्द  उचित उपचार करा कर, अपने स्वास्थ्य को ठीक करा कर इससे बाहर आना है।


११. बच्चों की शिक्षा पर भी ध्यान देना है यह स्वयं जांचना है कि बच्चों ने लगभग 2 सालों में जो शिक्षा ग्रहण करनी थी क्या वह उसको लगभग उसी अनुरूप ग्रहण कर पा रहे हैं या नहीं। 


१२. कोई भी भूखा ना रहे कोई भी बगैर इलाज के ना रहे, इसके लिए प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष अपने आप को सेवा से जोड़ना है अगर प्रत्यक्ष आकर खुद नहीं कर सकते तो जो संस्थाएं इन कार्यों में लगी हुई है उनसे अवश्य जुड़े।


१३. नियम व्यवस्था और कानूनों का पालन करते हुए कोशिश करें कि जहां भी संभव हो सके, जहां तक संभव हो सके , ऐसे लोगों को रोजगार देवें या ऐसे कार्य करें, जिससे जो लोग अपना रोजगार खो बैठे हैं, वह रोजगार मुखी कार्य कर सकें ,इसके लिए उन्होंने मिट्टी का मटका खरीदने का एक सांकेतिक उदाहरण भी दिया । इसको हम अलग-अलग क्षेत्रों में अपने विवेक के हिसाब से उपयोग, उपरोक्त संकेत, को समझते हुए अपने खरीदारी मैं बदलाव लाकर, समाजसेवी कार्य  हेतु कर सकते हैं ।

१४. Success is not final,failure is not fatal,its the courage to  continue, only thing that matters.



१५. यूनान, मिश्र , रोम सब मिट गये। 
कुछ बात है ऐसी ,

कि हस्ती मिटती नहीं हमारी ।


यश अपयश की बात को सोचे बगैर सतत प्रयास करना जब तक कि अपने लक्ष्य , जो कि इस वक्त महामारी को पराजित करना है,वह प्राप्त ना हो जाए।  तब तक दृढ़ संकल्प बांधकर दृढ़ निश्चय रखकर, सत्यता से, धैर्य पूर्वक ,सतत प्रयास, सजग प्रयास और सक्रिय प्रयास करना । महामारी हारेगी , हम निश्चित रूप से जीतेंगे इसमें किंचित मात्र भी संदेह नहीं है।