ग्राम पंचायत बरती कला के रोजगार सहायक की मनमानी
ग्राम पंचायत बरती कला के रोजगार सहायक की मनमानी हितग्राही को पता नहीं समतलीकरण पास हुआ कि नहीं सचिव डकार गई चालिस तयहजार से ऊपर की राशि। एक फौडा मीटटी भी जमीन में नहीं खुदा और कागजों में हो गया समतलीकरण तैयार।

आपको बता दें कि ग्राम पंचायत बरती कला में रोजगार सहायक की मनमानी छठे आसमान पर है। हितग्राही को पता नहीं है कि हमारा समतलीकरण भी पास हुआ है। अंदर अंदर ही रोजगार सहायक के द्वारा  लोगों का हाजिरी भर कर और कागजों में समतलीकरण कर दिया फिनिश। जब पता चला गांव वालों को तो गांव वालों ने खुलकर रोजगार सहायक का विरोध किया ।यहां तक की जो व्यक्ति मनरेगा  के तहत गोदी खनन का  कार्य  नहीं किया है उसके नाम पर भी मास्टर रोल तैयार कर और उसके खाते में पैसा भेज दिया गया है ।जब लोगों से पूछा गया आपके खाते में पैसा कैसे आया तो उनको खुद को पता नहीं है कि पैसा कौन हमारे खाते में डाला और कौन हमारा मनरेगा में हाजिरी भरा हैं । बातचीत के दौरान जब जनपद सीईओ वेद प्रकाश पांडे से पूछा गया तो उन्होंने बात को अनदेखा करते हुए बोले कि कोड गलत हो गया किसी दूसरे का कार्य किसी दूसरे के कार्य में चला गया। आपको बता दें कि मनरेगा के कार्य में सर्वप्रथम हितग्राही का डिमांड भेजा जाता है। जिस व्यक्ति का डिमांड में नाम आता है वह व्यक्ति मनरेगा में कार्य करने जाते हैं। और यह कार्य 1 दिन 2 दिन पूर्व ही होता है डिमांड विधिवत हितग्राही के कार्य के आधार पर जनपद कार्यालय से संबंधित सचिव को दिया जाता है। यहां पर जनपद पंचायत सीईओ के बातों से यह साफ जाहिर होता है कि ऐसे कार्य में उनका भी समर्थन रोजगार सहायकों को प्राप्त है। आपको बता दें कि रोजगार सहायक बरती कला कमलावती अपने फर्जी  कार्य  करने के लिए लगातार सुर्खियों में रहती हैं। गांव की महिलाओं ने रोजगार सहायक का खुल के विरोध किया है साथ ही साथ ग्राम पंचायत बरती कला के सरपंच भी रोजगार सहायक को अपने पंचायत से दूर करने जैसा मनसा प्रतीत करते नजर आए। देखने वाली बात होगी  किस प्रकार से प्रशासन एक्शन लेती है। या सिर्फ कागजों में ही येसी मनमानी सिमट के रह जाती है।

संदीप कुशवाहा की रिपोर्ट