कैची धाम मन्दिर में इस बार भी नही हुआ भण्डारा लगातार दो वर्ष से नही गूँजी बाबा के जयकारों की आवाज। हजारों भक्तों ने मन से किया स्मरण।
कैची धाम मन्दिर में इस बार भी नही हुआ भण्डारा लगातार दो वर्ष से नही गूँजी बाबा के जयकारों की आवाज। हजारों भक्तों ने मन से किया स्मरण।
रिपोर्ट ललित जोशी
  नैनीताल।कोरोना महामारी के चलते बीते वर्ष की तरह इस वर्ष भी 15 जून को बाबा नीम करौली महाराज के धाम कैंची में विशाल भंडारे का आयोजन नही हो सका। आज से तीन चार साल पहले बाबा के धाम में हजारों की संख्या में प्रसाद ग्रहण करने के लिये लाईन में लगे हुए रहते थे जैसा कि चित्र के माध्यम से देखा जा सकता है।
मंदिर में भक्तों के प्रवेश पर रोक के चलते सड़क मार्ग से ही लोग बाबा को नमन करते हुए दिखाई दिए ऐसा 57 सालों में दूसरी बार हुआ है।  कैंची धाम में विशाल भंडारे का आयोजन नही हो सका।जबकि हर वर्ष हजारों भक्त इस विशाल भंडारे में शामिल होकर बाबा का आशीर्वाद लेते थे और कैंची धाम भक्तों के जयकारों से गूंज उठता था।
 पूर्व में ही कैंची धाम का वार्षिकोत्सव कार्यक्रम न होने की घोषणा के बावजूद कैंची धाम में मंगलवार को सुबह से ही पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के साथ ही नैनीताल, हल्द्वानी से श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। लेकिन उन्हें आश्रम के बाहर एवं अंदर मौजूद पुलिस कर्मियों ने भीतर प्रवेश नहीं करने दिया। लेकिन मंदिर के अंदर मंदिर ट्रस्ट के अलावा भी अन्य लोगों की मौजूदगी देखी गई। लोग वाहनों की पार्किंग की ओर से भी मंदिर में प्रवेश करते देखे गए। इस पर श्रद्धालुओं में नाराजगी देखी गई। बाद में ऐसे लोगों को भी सुबह की आरती के बाद मंदिर से बाहर भेजा गया। सुबह 9 बजे तक लोगों को प्रसाद भी नहीं दिया गया। हालांकि मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधक विनोद जोशी ने बताया कि बाद में बाहर सड़क पर आने वाले श्रद्धालुओं को सीमित मात्रा में प्रसाद वितरित किया गया और उनका चढ़ावा लेकर भी बाबा को चढ़ाया गया ।
यहां हर वर्ष इसके स्थापना दिवस 15 जून को ही लाखों सैलानी जुटते हैं, और वर्ष भर भी श्रद्धालुओं का आना लगा रहता है। कहते हैं कि बाबा की हनुमान जी के प्रति अगाध आस्था थी, और उनके भक्त उनमें भी हनुमान जी की ही छवि देखते हैं, और उन्हें हनुमान का अवतार मानते हैं। बाबा के भक्तों का मानना है कि बाबा उनकी रक्षा करते हैं, और साक्षात दर्शन देकर मनोकामनाऐं पूरी करते हैं। यहां सच्चे दिल से आने वाला भक्त कभी खाली नहीं लौटता। यहां बाबा की मूर्ति देखकर ऐसे लगता है जैसे वह भक्तों से साक्षात बातें कर रहे हों।