पर्यटन नगरी में पेयजल की आपूर्ति निरंतर होना आवश्यक है।
पर्यटन नगरी में पेयजल की आपूर्ति निरंतर होना आवश्यक है।अनिल बलूनी
रिपोर्ट । ललित जोशी
नैनीताल - सरोवर नगरी में पेयजल समस्या के स्थाई समाधान के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक  सर्किट हाउस काठगोदाम में राज्यसभा सांसद  अनिल बलूनी की अध्यक्षता मे सम्पन्न हुई। इस बैठक में सांसद अजय भटट भी मौजूद थे। 
श्री बलूनी ने अधिकारियों से कहा कि पर्यटन नगरी नैनीताल में पेयजल के स्थायी समाधान जरूरी है। उन्होने बताया कि दशको पहले नैनीताल शहर तथा उसके आसपास आबादी कम थी ऐसे में नैनीझील से पानी लिफ्ट कर पेयजल आपूर्ति हो जाती थी, लेकिन पर्यटन नगरी के साथ ही आसपास के इलाकों मे जनसंख्या वृद्वि से पेयजल की समस्या होने लगी है। जिसके कारण शहर को कुछ समय ही पानी की आपूर्ति हो  पा रही है जबकि पर्यटन नगरी में पेयजल की आपूर्ति निरंतर होना आवश्यक है।  जिसका स्थाई समाधान आवश्यक है। उन्होने बताया कि वर्तमान में नैनीताल झील से 8 एमएलडी पानी लिफ्ट किया जा 
रहा है। झील के रिचार्ज ना होने तथा  पानी का दोहन होने के कारण झील का स्तर काफी नीचे चला जाता है। इस सब तथ्यों को ध्यान मे रखते हुये जरूरी है कि हम नैनीताल शहर को निर्बाध पानी की आपूर्ति के लिए 2055 की जनसंख्या का आंकलन करते हुये कार्ययोजना बनायें। उन्होने बताया कि आने वाले समय में नैनीताल शहर को लगभग 41 एमएलडी पेयजल की आवश्यकता का आंकलन किया गया है। ऐसे में हमे नैनीझील की निर्भरता को कम करते हुये। गरमपानी कोसी नदी से जलापूर्ति योजना बनानी होगी। उन्होने अधिकारियो से कहा कि इस कार्य योजना को तत्काल प्राथमिकता मे शामिल करते हुये डीपीआर बनाकर भारत सरकार को उपलब्ध करायें। उन्होने कहा कि इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट के लिए भारत सरकार से फंडिंग कराई जायेगी। उन्होने बताया कि भारत सरकार के एनएचपी (नेशनल हाइड्रो प्रोजेक्ट) द्वारा सहयोग किया जायेगा। 
सांसद श्री बलूनी ने बताया कि सिचाई विभाग को डीपीआर बनाने के लिए 75 लाख की धनराशि जारी की जा चुकी है ।उन्होेने सिचाई विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिये कि वह 15 अक्टूबर तक सिचाई अनुसंधान संस्थान रूडकी के तकनीकी मार्गदर्शन मे डीपीआर तैयार करायें। उन्होने जलनिगम तथा जलसंस्थान के अधिकारियो से कहा कि इस प्रोजेक्ट में वन भूमि हस्तान्तरण के सम्बन्ध मे भी कार्यवाही प्राथमिकता से की जाए। 
सांसद  अजय भटट ने कहा कि नैनीताल पर्यटन नगरी है ऐसे मे वहां क्षेत्रवासियों एवं पर्यटको को निर्बाध पेयजल उपलब्ध कराने हेतु यह एक महत्वाकांक्षी योजना है इसलिए अधिकारी युद्व स्तर पर कार्य कर अक्टूबर तक डीपीआर भारत सरकार को भेजना सुनिश्चित करें। उन्होने कहा कि इस पेयजल योजना के बनने से नैनीझील पर भी दबाव कम होगा। 
जिलाधिकारी  धीराज सिह गर्व्याल ने बताया कि प्राथमिक सर्वे के अनुसार कोसी नदी (गरमपानी) से नैनीताल तक पानी पहुचाने के लिए 24 किमी लम्बी पेयजल लाइन बिछाई जायेगी।नदी से 1.53 एमसीएम पानी स्टोर किया जायेगा। कोसी नदी से नैनीताल तक पेयजल पहुचाने हेतु चार पम्पिंग स्टेशन बडेरी, रातीघाट, पाडली एवं दूणीखाल में बनाये जायेंगे। उन्होने बताया कि बडेरी पुल के पास पानी के संग्रह करने के लिए 120 मीटर लम्बी तथा 12 मीटर ऊंची क्रत्रिम झील बनाई जायेगी जिसमें पानी का भण्डारण कर पम्पिंग स्टेशनो के जरिये लिफ्ट कर पाइप लाइन के जरिये नैनीताल शहर को आपूर्ति की जायेगी। उन्होने कहा बडेरी मे बनने वाली झील से आसपास के जलस्रोत रिचार्ज होंगे तथा यह झील पर्यटन  का केन्द्र बनेगी जिससे रोजगार के अवसर भी सृजित होगें। 
बैठक मे अधिशासी अभियन्ता हरीश चन्द्र सिह भारती,अधिशासी अभियन्ता पेयजल निगम जीएस तोमर व अन्य अधिकारी मौजूद थे।