केन्द्रीय अध्ययन दल ने बाड़मेर में जाने अकाल के हालात
*केन्द्रीय अध्ययन दल ने बाड़मेर में जाने अकाल के हालात*

*सूखे से प्रभावित 5.40 लाख किसानों एवं 52 लाख पशुधन को राहत की दरकार*

बाड़मेर से संवाददाता वागा राम बोस की रिपोर्ट

बाड़मेर, 17 फरवरी। भारत सरकार के अंतर मंत्रालयिक केंद्रीय अध्ययन दल ने गुरुवार को बाड़मेर जिले में अकाल के हालात का जायजा लिया।
   खरीफ फसल में सूखे की स्थिति के कारण हुए नुकसान के आंकलन के लिए बाड़मेर पहुंचे अन्तर मंत्रालय केन्द्रीय दल ने गुरुवार को कलेक्टरेट में जन प्रतिनिधियों, एवं अधिकारियों के साथ चर्चा की और क्षेत्रवार, विभागवार एवं प्रवृत्तिवार विस्तृत जानकारी ली। 
  जिला कलक्टर डॉ. लोक बन्धु ने केन्द्रीय अध्ययन दल को जिले की भौगोलिक परिस्थितियों और प्राकृतिक आपदाओं आदि के मद्देनज़र सूखे व इससे प्रभावित जनजीवन और पशुओं पर पड़ने वाले प्रभाव के साथ ही इससे संबंधित तमाम पहलुओं पर पीपीपी के माध्यम से विस्तार से अवगत कराया और दल से आग्रह किया कि जिले के इन वास्तविक हालातों और तथ्यों को दृष्टिगत रखते हुए पर्याप्त सहायता मुहैया कराई जाए।
बैठक में केन्द्रीय अध्ययन दल के अधिकारियों केन्द्रीय जल आयोग के निदेशक एच.एस. सेंगर एवं नीति आयोग नई दिल्ली के सहायक निदेशक शिवचरण मीणा ने जिले के हालातों के बारे में विस्तार से जानकारी ली और खरीफ में सूखे की स्थिति के कारण हुए नुकसान के बारे में कृषि, पशुपालन, राजस्व आदि से संबंधित अधिकारियों से चर्चा की और जानकारी पायी।
बैठक में राज्य गोसेवा आयोग के अध्यक्ष मेवाराम जैन ने भी जिले को अधिक से अधिक सहायता एवं राहत मुहैया कराने का आग्रह किया और कहा कि जिले में अकाल की परिस्थितियों को देखते हुए नरेगा में रोजगार दिवसों की संख्या को 100 से बढ़ाकर 150 की जानी चाहिए ताकि लोगों को रोजगार प्राप्त हो एवं आसानी से अपना जीवनयापन करने में सम्बल प्राप्त हो सके। 
 केन्द्रीय अध्ययन दल के एच.एस. सेंगर ने इस अवसर पर विश्वास दिलाया कि जिले के इन विषम हालातों के बारे में केन्द्र सरकार को अवगत कराया जाएगा और जिले को हरसंभव राहत एवं सहायता के लिए प्रयास किए जाएंगे।
जिला कलक्टर लोक बंधु ने दल का स्वागत करते हुए जिले की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि खरीफ फसल 2021 में जिले के लगभग 5 लाख 40 हजार कृषक प्रभावित हुए हैं जिन्हें कृषि आदान-अनुदान की राशि वितरित की जाएगी। साथ ही जिले में 52 लाख पशुधन के लिए भी चारा पानी का प्रबंध भी किया जाना है। इसके लिए आगामी दिनों की योजना, ग्रीष्मकाल में पेयजल परिवहन आदि पर विस्तार से जानकारी दी।
जिला कलक्टर ने जिले में फसलों से हुए नुकसान के बारे में अवगत कराते हुए बताया कि मरुस्थलीय क्षेत्र होने तथा विषम भौगोलिक हालातों के चलते क्षेत्र में सूखे व अकाल के कारण किसानों और पशुओं के लिए कई समस्याएं सामने आती हैं और इससे जनजीवन दुष्प्रभावित होता है। 
  राज्य गोसेवा आयोग के अध्यक्ष एवं विधायक मेवाराम जैन ने बताया कि अपर्याप्त बारिश के कारण जिले में अकाल की बारंबारता होती है एवं ऐसे में गायों एवं पशुधन को बचाना मुश्किल हो जाता हैं एवं लोग अपने पालतू पशुओं को भी आवारा छोड़ देते है। इसलिए चारा पानी की मांग बढ़ जाती हैं। ऐसे में पर्याप्त केंद्रीय सहायता की आवश्यकता बहुत ज्यादा है।
इस दौरान जिला प्रमुख महेंद्र चौधरी ने दल को बताया कि विस्तृत भू भाग में फैले जिले में बरसात कम होने के कारण अकाल के हालात बने रहते हैं। इस बार भी जुलाई के बाद बारिश नहीं हुई। इससे किसानों की बोयी गई फसलें खराब हो गई। जाहिर है कि ऎसे कठिन हालातों में पशुधन को बचाने के लिए जल्द से जल्द व्यापक पैमाने पर राहत एवं सहायता के साथ ही पशु शिविरों के संचालन, पशुपालकों को चारा उपलब्ध कराने और भूमिहीन पशुपालकों के पशुओं के लिए भी पशु शिविरों का लाभ दिए जाने की आवश्यकता है।
  बैठक में जिला प्रमुख महेंद्र चौधरी, बाड़मेर ग्रामीण पंचायत समिति की प्रधान श्रीमती जेठी देवी, अतिरिक्त जिला कलक्टर ओम प्रकाश विश्नोई, मुख्य कार्यकारी अधिकारी मोहनदान रतनू, उपखण्ड अधिकारी रोहित चौहान, पेयजल, कृषि, पशुपालन सहित तमाम महत्वपूर्ण विभागों के जिलाधिकारी उपस्थित थे।
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