माओवादियो के लिए काल बने राजपुरोहित,कई बार मौत से सामना-राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित,बाड़मेर आगमन पर अभिनंदन
*माओवादियो के लिए काल बने राजपुरोहित,कई बार मौत से सामना-राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित,बाड़मेर आगमन पर अभिनंदन।*

बाड़मेर से वागा राम बोस की रिपोर्ट

बाड़मेर, 02 जनवरी। नक्सवाली इलाकांे मंे अक्सर मौत से सामना होता है। अनजान दुश्मन कब और किस समय हमला कर दें,कुछ पता नहीं होता। नक्सलवादियों का सबसे बड़ा हथियार गुरिल्ला युद्ध है, लेकिन एसएसबी उसका मुंहतोड़ जवाब देती है। सशस्त्र सीमा बल के अभियानांे की बदौलत अब माओवादी समर्पण कर रहे हैं या फिर इलाका ही छोड़ रहे हैं। सशस्त्र सीमा बल के डिप्टी कमांडेंट एवं माओवादियांे के लिए काल माने जाने वाले नरपत सिंह राजपुरोहित ने यह बात कही। वीरता पुरस्कार से सम्मानित होकर बाड़मेर पहुंचने पर विभिन्न संगठनांे की ओर से राजपुरोहित का अभिनंदन किया गया।
एसएसबी के डिप्टी कमांडेंट नरपत सिंह राजपुरोहित के मुताबिक वर्ष 2018 से पहले माओवादियांे की मजबूत पकड़ थी। माओवादियांे पर नकेल कसने के लिए विशेष दस्ता बनाया गया। एनकांउटर के दौरान दो माओवादी मारे गए। इसका परिणाम यह निकला कि माओवादियांे के स्पेशल एरिया कमांडर को मजबूरन आत्मसमर्पण करना पड़ा। उस पर 25 लाख रूपए का इनाम घोषित था। अब तक डिप्टी कमांडेंट राजपुरोहित की टीम ने कई नक्सलवादियों को मार गिराया। मौजूदा समय में वे झारखंड के माओवादी प्रभावित इलाके में तैनात हैं। अपने अदम्य साहस से दुश्मनों को धूल चटाने में सबसे आगे रहने वाले नरपत सिंह राजपुरोहित एवं उनकी टीम ने अपनी जान जोखिम में डालकर 8 माओवादियों को आत्मसमर्पण करने के लिए विवश कर दिया था। झारखंड एवं ओडिशा के माओवाद प्रभावित इलाकों में उनके खौफ से या तो माओवादी समर्पण कर रहे हैं या फिर वे इलाका ही छोड़ रहे हैं। नरपत सिंह सिर्फ अपनी बटालियन ही नहीं,बल्कि देश की 1751 किमी सीमा की निगरानी करने वाली एसएसबी के हीरो हैं। वे अक्सर अपनी टीम के साथ झारखंड के जंगलों में देश के दुश्मनों को ढूंढ़ते फिरते हैं। नरपत सिंह बताते हैं कि नक्सलवादियों का सबसे बड़ा हथियार गुरिल्ला युद्ध है, लेकिन एसएसबी उसका मुंह तोड़ जवाब देती है। उनकी टीम ने न केवल कई नक्सलवादियों को मार गिराया बल्कि अब तक 8 हार्डकोर नक्सलियों को पकड़ भी चुकी है। उन्हांेने अपनी टीम के साथ 28 जुलाई 2018 को दुमका में एक ऑपरेशन को लीड करते हुए 2007 से सक्रिय नक्सली दसनाथ देहरी और अनुज पहाडि़या को करीब घंटे तक की मुठभेड़ के बाद मार गिराया था। 20 नक्सलियों का बहादुरी से मुकाबला किया था। उनकी टीम के पराक्रम को देखते हुए एसएसबी ने गैलेंट्री अवार्ड के लिए उनके नाम की अभिशंषा की थी। उल्लेखनीय है कि सशस्त्र सीमा बल के स्थापना दिवस के अवसर पर डिप्टी कमांडेंट नरपत सिंह राजपुरोहित को अदम्य साहस एवं पराक्रम के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया गया। इस दौरान राजपुरोहित सहित चार जवानांे को केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री निशिध प्रामाणिक ने गैलेन्ट्री अवार्ड देकर सम्मानित किया। अपने अदम्य साहस और पराक्रम के लिए इससे पूर्व भी राजपुरोहित कई मर्तबा सम्मानित हो चुके हैं। वर्ष 2012 में नरपत सिंह राजपुरोहित ने एसएसबी बतौर असिस्टेंट कमांडेंट ज्वाइन की थी। इससे पहले जवाहर नवोदय विद्यालय पचपदरा एवं डीयू खालसा कॉलेज दिल्ली से उच्च शिक्षा प्राप्त की।                                                                                                                                                                 हमले का तूफानी अंदाज से जवाबः पहाड़ों, जंगलों के बीच अकूत खनिज.संपदा से घिरे इन इलाकों में नक्सलियों का सबसे बड़ा हथियार है गुरिल्ला वॉर, मतलब अचानक से हमला। लेकिन राजपुरोहित बताते है कि अब उनके गुरिल्ला वॉर का जवाब हम लोग भी तूफानी अंदाज में देते हैं।
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