हत्या के आरोपी को आजीवन सश्रम कारावास की सजा
हत्या के आरोपी को आजीवन सश्रम कारावास की सजा
(मान्नीय श्री उपेन्द्र कुमार सिंह सत्र न्यायाधीष का फैसला)



पन्ना- मान्नीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश पन्ना श्री उपेन्द्र कुमार सिंह ने मृतक नारायण आदिवासी (गोंड़)  तनय गनेशा गोंड़ उम्र-40 वर्ष निवासी दरेरा की हत्या के आरोपी हिम्मत सिंह पिता पूरन सिंह उम्र-30 वर्ष, निवासी मडै़यन थाना मड़ला, जिला पन्ना (म0प्र0) को दोषसिद्ध मानते हुये आजीवन कारावास एवं दो हजार रूपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया। अर्थदण्ड अदा न करने पर तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगताये जाने का आदेष दिया गया।

जिला लोक अभियोजक श्री किशोर श्रीवास्तव ने अभियोजन के अनुसार बताया कि दिनांक 16.12.2019 की रात्रि लगभग 09 बजे ग्राम ककरी थाना सलेहा में फरियादी विद्याबाई अपना भोजन तैयार कर अपने पति मृतक नारायण आदिवासी के साथ टपरिया में थी, तब आरोपी हिम्मत सिंह गों़ड़ आया और वह नारायण से लड़ाई-झगड़ा करने लगा और मॉ-बहन की बुरी-बुरी गालियां देने लगा। फरियादी विद्या और मृतक नारायण ने गाली देने से मना किया तो आरोपी हिम्मत ने टायर के लीवर से ग्राम ककरी में स्थित पत्थर खदान के पास बनी फरियादिया विद्या आदिवासी की टपरिया में साआशय एवं ज्ञानपूर्वक नारायण आदिवासी को आरोपी हिम्मत सिंह ने टायर लीवर से सिर पर इरादतन वार किया जिससे मृतक नारायण आदिवासी गिर कर बेहोश हो गया और उसकी मृत्यु रीवा मेडीकल कॉलेज में हो गई, जिस पर थाना सलेहा में अपराध क्रमांक-336/2019 पंजीबद्ध हुआ तथा बाद विवेचना चालान मान्नीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।

अभियोजन की ओर से मान्नीय न्यायालय के समक्ष साक्षी विद्या बाई, किशन, उत्तम सिंह, महेन्द्र सिंह, डॉ0 हर्षवर्धन, लक्ष्मी गोंड़, विश्वनाथ प्रताप, बी.के. शुक्ला, शारदा कुशवाहा, निरंकार सिंह, कृष्ण कुमार, सुरेश सेन, रत्नेश त्रिपाठी, महेश त्रिपाठी के कथन कराये गये। साक्षियों के कथन एवं समग्र परिस्थितियों की श्रृंखला में अभियोजन के प्रकरण को युक्तियुक्त संदेह से परे मानते हुये मान्नीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश पन्ना श्री उपेन्द्र कुमार सिंह ने मृतक नारायण आदिवासी (गोंड़)  तनय गनेशा गोंड़ उम्र-40 वर्ष निवासी दरेरा की हत्या के आरोपी हिम्मत सिंह पिता पूरन सिंह उम्र-30 वर्ष, निवासी मडै़यन थाना मड़ला, जिला पन्ना (म0प्र0) को दोषसिद्ध मानते हुये आजीवन कारावास एवं दो हजार रूपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया। अर्थदण्ड अदा न करने पर तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगताये जाने का आदेष दिया गया।