आज पोला का पर्व बड़े धूमधाम से भारत के सभी किसानों ने मनाया

आज पोला का पर्व बड़े धूमधाम से भारत के सभी किसानों ने मनाया

पोला पर्व महाराष्ट्र में मनाया जाने वाला किसानों का बड़ा पर्व माना जाने वाला धन्यवाद पर्व बनाया जाता है जो कि अपने  बैलों को सजा करके उनकी पूजा करके किसानों के कृषक में कृषि कार्य हेतु सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले बैलों को बड़ी सुंदरता के साथ मिल जुल कर के सजाया जाता है ताकि उन्हें बहुत बहुत अच्छा धन्यवाद दिया जा सके पोला पर्व भादो मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है और इन बैलों का श्रंगार कर इनकी पूजा की जाती है इसके बाद बैल दौड़ कर की प्रथा कई किसानों के गांव में की जाती है एवं बच्चे भी मिट्टी का और लकड़ी के बने हुए बालों को लेकर घर घर जाकर बालों के दर्शन करवाते रहते हैं पोला पिथौरा के नाम से भी प्रचलित है यह पर्व



भाद्रपद

कृष्णा मासिया मैं यह त्यौहार महाराष्ट्र कर्नाटक छत्तीसगढ़ और बैतूल जिले मैं बड़े हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाने वाला किसानों का बड़ा त्यौहार है पोला क्यों नाम पड़ा है इस पर्व का जब भगवान श्री कृष्ण ने धरती पर कंस का संहार करने के लिए जन्म लिया था कृष्ण जी के जन्म से ही कंस उन्हें मारने के लिए तरह-तरह के उपाय और असुरों का सहारा लिया और बचपन से ही उनकी जान का दुश्मन बना रहा तब भी बात नहीं बनी तब उन्होंने पोलासूर नाम के एक राक्षस का सहारा लेते हुए कृष्ण जी को मारने के लिए भेजा गया तब भगवान श्रीकृष्ण ने पोलासूर का वध कर दिया वह दिन आज भादो मास का अमावस्या का दिन ही था इस त्यौहार को गांव के सभी बच्चे बड़े लाड प्यार से बनाते हैं त्यौहार का महत्व यहां भारत जैसे धरती पर कृषि क्षेत्र में किसानों का सबसे अहम  बैल के हमेशा साथ देने की वजह एवं भरण पोषण में मित्रता के भागीदारी होने का परिणाम साबित करना इसी वजह से हमारे किसान आज के दिन सारे बैलों को बढ़िया से  नहला धूलाकर के साथ सिंगार कर उनकी पूजा-अर्चना करते हैं और इस पोला पर्व को बड़े धूमधाम से मनाते हैं

घोड़ाडोंगरी रिपोर्टर मनोज पवार