15 सितंबर से डेंगू पर प्रहार, जनजागरण अभियान शुरू
15 सितंबर से डेंगू पर प्रहार, जनजागरण अभियान शुरू,

हर घर का होगा सर्वे, लार्वा मिला तो हो सकता है जुर्माना।
 
बैतूल/सारनी। कैलाश पाटील

राज्य शासन द्वारा सभी जिलों में बुधवार 15 सितंबर से डेंगू नियंत्रण के लिए डेंगू प्रहार जन अभियान की शुरूआत की जा रही है। इस अभियान के तहत नगर पालिका परिषद सारनी क्षेत्र में डेंगू से बचाव एवं नियंत्रण के उपायों को लेकर जनजागरण किया जाएगा। मच्छरों का लार्वा नष्ट किया जाएगा। हर घर तक सर्वे होगा यदि ज्यादा मात्रा में लार्वा मिलता है तो संबंधित पर जुर्माना भी किया जा सकता है। मुख्य नगर पालिका अधिकारी सीके मेश्राम एवं स्वच्छता अधिकारी केके भावसार ने बताया कि डेंगू प्रहार अभियान की शुरूआत प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा बुधवार 15 सितंबर को सुबह 10 बजे की जाएगी। जिसके अंतर्गत नपा सारनी क्षेत्र में भी व्यापक रूप से अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत नगर के प्रत्येक घरों में लार्वा सर्वे, स्पेस स्प्रे, फागिंग के कार्य किए जाएंगे। रिहायशी क्षेत्रों में जल जमाव हटाने के लिए दल गठित किए जा रहे हैं। ये गतिविधियां सतत संचालित की जाएगी। सर्वे के दौरान काफी संख्या में किसी स्थान पर लार्वा मिलता है तो संबंधित के विरूद्ध जुर्माने की कार्यवाही की जाएगी तथा पंचनामा बनाकर 500 रूपये या अधिक का जुर्माना किया जा सकता है। श्री भावसार ने बताया कि इससे पूर्व ही नगर पालिका ने नगर के कई वार्डो में सर्वे कर 500 से 600 आवासों से लार्वा नष्ट किये हैं। डेंगू नियंत्रण लगातार जारी है। 
श्री भावसार ने बताया कि वर्षाकाल के दौरान कई स्थानों पर जल जमाव होने के कारण, घरों में छोटे कंटेनर, पानी की टंकियों अथवा अन्य स्थानों पर एक सप्ताह से ज्यादा जल संग्रह के कारण डेंगू और चिकनगुनिया जैसे रोग फैलते हैं। इन्हें फैलाने वाले एडिज मच्छर का प्रजनन शुरू हो जाता है। इन स्रोतों में सफाई नहीं होने के कारण लार्वा की उत्पत्ति होती है। माह अगस्त से अक्टूबर तक इन बीमारियों का प्रकोप ज्यादा होता है। इसलिए इन दिनों में सावधानियां जरूरी है।

डेंगू से बचाव -

कूलर, टंकी, गमले, फूलदान, पुराने टायर, खाली प्लाट अथवा गड्ढे में 7 दिनों से ज्यादा पानी जमा ना रहने दें। पानी खाली ना होने की स्थिति में छानकर लार्वा नष्ट करें। साफ पानी में पनपते हैं, इसलिए घरों में स्वच्छता रखें। पानी जमा ना होने दें। पूरी बाहों के कपड़े पहनें, शाम को नीम की पत्तियों का धुआं करें एवं मच्छरदानी लगाकर सोये।