बंजर भूमि व चारागाह पर प्रशिक्षको का प्रशिक्षण
*बंजर भूमि व चारागाह पर प्रशिक्षको का प्रशिक्षण*--

बाड़मेर से वागाराम बोस की रिपोर्ट 

जिला परिषद सभागार बाड़मेर में शामलात की पुनर्स्थापना के लिए ग्रामीण समुदाय का क्षमतावर्धन कार्यक्रम जो कि  जिला  परिषद बारमेर,आईटीसी मिशन सुनहरा कल, राजस्थान सरकार और फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्योरिटी के सयुक्त तत्वाधान में  एक संयुक्त क्षमता वर्धन कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। इस कार्यक्रम का क्रियान्वयन राज्य के 8 जिलों में किया जा रहा है। इस पर एफ ई एस के उमेश पालीवाल ने बताया गया कि हम सब मिलकर इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए यह प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। शामलात संसाधनों के संरक्षण के लिए जानकारी प्रदान की गई। चारागाह विकास के अंतर्गत पौधारोपण, खाई खुदाई के बारे में जानकारी दी गयी। चारागाह का विकास समिति गठन के बारे में पूर्ण जानकारी दी गई। चरागाह एवं गोचर जमीन के प्रति स्थानीय लोगों का लगाव होना जरूरी है यदि वह लोग जागरूक हो गए तो चारागाह अच्छा विकास किया जा सकता हैं। ग्रामीण समुदाय का जीवन प्राकृतिक संसाधनों पर जुड़ा हुआ है। प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना हम सबकी जिम्मेदारी है। चरागाह समिति नियम बनाने के बारे में बताया गया। प्रशिक्षको में अच्छे गुणों के बारे में तथा अच्छा प्रशिक्षण दिए जाने के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई मघा राम द्वारा विभिन्न परिपत्रों के उपयोग के बारे में बताया गया। इस अवसर पर जिले के सभी तकनीकी सहायक, सहायक विकास अधिकारी, फाउंडेशन फोर इकोलॉजिकल सिक्योरिटी कैलाश शर्मा , मगाराम कड़ेला, दिनेश कुमार, हाकमसिंह, अश्विनी व्यास उपस्थित रहे।