ए सी कमरे में हुई नगर की समस्याओं की समीक्षा से नहीं होगा समाधान - नागरिक मंच
ए सी कमरे में हुई नगर की समस्याओं की समीक्षा से नहीं होगा समाधान - नागरिक मंच
नगर आयुक्त का दौरा बना कस्बा में चर्चा का विषय 
लोगों ने अंबाला की तर्ज पर नागरिकों को टोकन देकर पायलट प्रोजेक्ट शुरू की मांग की
बराड़ा, 8 जुलाई, (जयबीर राणा थंबड़)। गत दिन जिला नगर आयुक्त धीरेन्द्र खड़गटा (आइएएस) का  बराड़ा की समस्याओं व मानसून मौसम में वर्षा के पानी की उचित निकासी आदि के संदर्भ में बराड़ा नगरपालिका का औचक निरीक्षण किया और अधिकारियों के साथ समीक्षा के उपरांत अधिकारियों को निर्देश  भी दिए। नगर आयुक्त का आकस्मिक निरीक्षण जनता में चर्चा का विषय बना हुआ है कि नगर आयुक्त बराड़ा नगर की मूलभूत समस्याओं और समाधान के लिए नपा अधिकारियों और कर्मचारियों से मंत्रणा करके चले गए, जबकि उक्त नपा अधिकारियों में से कोई भी यहां नहीं रहता और न ही उन्हें स्थानीय समस्याओं के निवारण होने या न होने से कोई सरोकार है, अलबत्ता वे अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को कार्य के आदेश-निर्देश देकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री अवश्य कर लेते हैं। परन्तु नगरपालिका द्वारा जनता को दी जाने वाली सुविधाएं आम लोगों तक पहुंच रही हैं या नहीं इस संदर्भ में कोई समीक्षा नहीं की जाती। नागरिक मंच का कहना है कि अधिकारी को कस्बा के विभिन्न भागों का भ्रमण कर मौके पर स्थिति का जायजा लेना चाहिए था, जिससे उन्हें बराड़ा की वास्तविक स्थिति ज्ञात होती। नागरिक मंच के धर्मपाल, अशोक कुमार,, हरिश्चंद्र, चरणजीत सिंह, सुशील कुमार, देवेंद्र कुमार, जसबीर सिंह, अनिल शर्मा, संजीव कुमार, मोहन लाल, जयप्रकाश, बलवंत राय आदि ने अधिकारी से सामाजिक संगठनों तथा जनप्रतिनिधियों से वस्तुस्थिति से अवगत होने की मांग की है। नागरिक मंच ने सरकार से अंबाला की तर्ज पर नागरिकों को टोकन आवंटन करके पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की मांग की, जिससे कर्मचारियों और नागरिकों में निरंतर संपर्क का प्रमाण सिद्ध हो सके। सरकारी कार्यप्रणाली के चलते घरों से कूड़ा एकत्रित करना और सफाई व्यवस्था स्थापित करना एक मुख्य समस्या है। वर्तमान स्थिति में नगर की गलियों-नालियों व नालों की सफाई व्यवस्था, डोर-टू-डोर कूड़ा एकत्रित करने, स्ट्रीट लाइट, सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ेदानों और शौचालयों आदि की सुविधाओं के लिए अधिकारी अपने आदेश देकर अपना कर्तव्य पूरा कर लेते हैं, परन्तु ठेकेदार द्वारा जनता की समस्याओं का समय पर निपटान न करने के चलते जनता का अधिकारियों और प्रशासन के बीच एक मौन आक्रोश रहता है, जिसका समापन होना आवश्यक है। अधिकारियों व प्रशासन के प्रति जनता का यह रोष जनप्रतिनिधियों को भुगतना पड़ता है। इस बात का उदाहरण इसी बात से लगाया जा सकता है कि नगर में फैली सफाई की अव्यवस्था को देखकर हर नागरिक की जुबान पर यह बात स्वत: ही आ जाती है कि ऐसे गैर जिम्मेदार अधिकारियों के कारण ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "स्वच्छ भारत अभियान" पर ग्रहण लगा हुआ है। 
बराड़ा में नगरपालिका स्थापित हो, इसके लिए कस्बावासियों ने बहुत संघर्ष किया और नगर की दशकों पुरानी मांग को पूरा करते हुए तत्कालीन विधायक संतोष सारवान ने बहुत वाहवाही भी बटोरी और साथ ही नगरपालिका स्तर की सुविधाओं के लिए कार्य किए, परन्तु मुख्य बाजार के चौड़ीकरण, नालों के निर्माण व सौंदर्यीकरण को व्यवस्थित तरीके से नहीं कर पाई। राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण मुख्य बाजार में पशु अस्पताल की जमीन पर रखे खोखे जहां मखमल में टाट का पैबंद साबित हो रहे हैं, वहीं इन अवैध कब्जाधारियों ने जनता और प्रशासन  को अपने राजनीतिक रसूख का भी अहसास भली-भांति करा दिया। इतना ही नहीं गलियों-नालियों के निर्माण कार्यों में भेदभाव, स्ट्रीट लाइट व कूड़ा एकत्रित करने की ठेकेदारी में घोटाले की बात को लेकर नगरपालिका अध्यक्ष पद के लिए बहुत भारी उठापटक भी हुई परन्तु यह बात अलग है कि अध्यक्ष परिवर्तन होने के बाद यह सब बातें गौन हो गई।
 
बराड़ा में मुख्य समस्या बरसाती पानी के निकासी की है, जिससे बरसात के दिनों में हर नागरिक तो दो-चार होता ही है साथ ही कस्बा के बीचों-बीच स्थित पुलिस थाना तो बरसाती पानी से पूरा ही डूब जाता है, उस हालत में आम आदमी की रक्षा करने वाले पुलिस कर्मचारी खुद सुरक्षा के मोहताज होते हैं। इसके अलावा बस स्टैंड और मौजूदा नगरपालिका कार्यालय भी बरसाती पानी के कहर से अछूता नहीं रहता। और सबसे ज्यादा समस्या तो वार्ड नंबर 9 के नागरिकों को भुगतनी पड़ती है, क्योंकि कटारिया आयरन स्टोर से लेकर जसबीर डेयरी तक पानी की निकासी के लिए कोई इंतजाम नहीं है और सारा बरसाती पानी सड़कों-गलियों में ही खड़ा रहता है और दुसरी ओर श्मशानघाट रोड पर पानी की निकासी के लिए बनाया गया नाला बराड़ा नपा की सीमा तक ही बना है और आगे अधोया गांव की सीमा शुरू हो जाती है, जहां नाले का निर्माण रूका होने के कारण बरसात का सारा पानी गलियों और लोगों के घरों में ही खड़ा रहता है। हालांकि जानकारी मिली है कि अब बराड़ा को बरसात के दिनों में पानी निकासी की किसी समस्या का सामना न करना पड़े इसके लिए सभी मुख्य नालियों को सीवरेज के मेनहोल के साथ अटैच कर दिया गया है, परन्तु इस व्यवस्था से आगामी दिनों में  सीवरेज के ओवरफ्लो होने जैसी होने वाली परेशानियों से भी इन्कार नहीं किया जा सकता।
गलियों नालियों की साफ-सफाई, डोर-टू-डोर कूड़ा एकत्रित करना, स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाएं अभी तक बराड़ा के प्रत्येक वार्ड और घर तक नहीं पहुंच पाई है। ऐसे में अधिकारियों और नेताओं की बड़ी-बड़ी बातें आम आदमी को सोचने पर विवश करती है कि दशकों से सूरत-ए-हाल वही है। सत्ता बदली है व्यवस्था नहीं।