सतत विकास की अवधारणा से कार्य करना जरूरी
चमोली उत्तराखंड। सतत विकास की अवधारणा से कार्य करना जरूरी  डा0 पुरोहित 
केशर सिंह नेगी थराली
जिवन्तिस वैलफेयर एवं चैरिटेबल ट्रस्ट, डाबर इन्डिया लि0 के तत्वाधान में आयोजित एक दिवसीय जडी़ बूटी किसान कार्यशाला में उच्च शिखरीय पादप कार्यिकी शोध केन्द्र (हैप्रेक), हे0न0ब0ग0वि0वि0, श्रीनगर  के वैज्ञानिक डा0 विजय कान्त पुरोहित द्वारा बताया गया कि क्षेत्र के विकास के लिये सतत  विकास की अवधारणा से कार्य करना होगा। जिसके लिये ग0वि0वि0 तथा जीवन्ति वैलफेयर ट्रस्ट, डाबर लि0 द्वारा मिल कर कार्य किया जा रहा है। जिसमें जडी़ बूटियों के अन्तर्गत कुटकी, कुठ, जटामांसी, अतीस, समेवा की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बद्रीनाथ वन प्रभाग, थराली रेंन्ज के रेंन्ज अधिकारी श्री  हरीश थपलियाल द्वारा कहा गया कि जडी़ बूटियों के संरक्षण के लिये कृषिकरण जरूरी है,  जिसके लिये ग0वि0वि0 के प्रयास सराहनीय हैं। कार्यक्रम में बतौर विशिष्ठ अतिथि उद्मोगिनी के एरिया कोर्डीनेटर श्री महाबीर सिंह रावत ने  कहा कि उद्मोगिनी भी इस क्षेत्र में लोगों के साथ जमीनी स्तर पर कार्य कर रहा है जसके लिये भविष्य में ग0वि0वि0 से तकनीकी सहयोग लेकर जडी़ बूटी कृषिकरण को और अधिक बढावा देकर क्षेत्र के विकास में योगदान शुनिश्चित करने का प्रयास किया जायेगा। कार्यक्रम विकास खन्ड थराली के रूईसाण, पार्था तथा कसबीनगर गांवों में आयोजित किया गया जिसमें लगभग 80 कास्तकारों को कुठ, कुटकी, अतीस, मांसी, समेवा की लगभग 15000 पौध वितरित की गयी। कार्यक्रम में क्षेत्र पंचायत सदस्य, ग्राम प्रधान, महिला मंगलदल अध्यक्ष तथा वनसरपंचों के साथ ही कई किसान मौजूद रहे।