सुरक्षा के लिए प्राइवेट डॉक्टरों ने सरकार के खिलाफ की हड़ताल
सुरक्षा के लिए प्राइवेट डॉक्टरों ने सरकार के खिलाफ की हड़ताल
अम्बाला (जयबीर राणा थंबड़) अम्बाला शहर व छावनी के प्राईवेट अस्पतालों ने आज दोपहर 2 बजे तक ओपीडी को बंद रखा और सरकार के खिलाफ अपना रोष जताते हुए काले रिबन लगाकर सरकार से सुरक्षा की गुहार लगाई।  अम्बाला शहर के आईएमए के प्रधान डॉ. अशोक सारवाल ने बताया कि आज शहर के सभी निजी अस्पतालों ने डॉक्टरों ने इस हड़ताल में बढ़ चढ़ कर भाग लिया।
उन्होंने बताया कि उप्रधान कपिल वोहरा, सेक्रेटरी राजीव अग्रवाल, संजय अग्रवाल समेत उनकी पूरी टीम द्वारा इस हड़ताल को लेकर निजी अस्पतालोंं को पहले से ही सूचित कर दिया गया था, लेकिन साथ ही यह भी कहा गया था कि डॉक्टर एमरजेंसी सेवाएं बंद नहीं करेंगे। सिर्फ ओपीडी बंद रखते हुए अपना रोष प्रदर्शन जताएंगे। आज अस्पतालोंं में डॉक्टरों ने काले रिबन लगाकर अपना रोष प्रकट किया और मरीजो को दोपहर बाद देखा। आईएमए के पूर्व प्रधान डॉ. प्रभाकर शर्मा ने कहा कि डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर कोई ठोस नियम नहीं बनाए गए हैं। कई बार प्राइवेट डॉक्टरों के साथ कई वारदातें हो चुकी हैं, लेकिन इसके बाद भी सरकार अभी तक नहीं जागी। उन्होंने बताया कि आज रूटीन की ओपीडी बंद रही, लेकिन एमरजेंसी सुविधाएं पूरी तरह सुचारू रही। डॉ. प्रभाकर ने बताया कि अनेक बाद देखने मे आया है कि अस्पतालों मे रोगियों के परिजन हमला कर देते हैं। जिससे डॉक्टरों को भी भारी हानि का सामना करन पड़ता है। ऐसे में यदि सरकार पूरे भारत में कोई ठोस कानून बनाती है तो इससे प्रत्येक निजी डॉक्टर को फायदा होगा। उन्होंने बताया कि आईएमए के आह्वान पर आज यह हड़ताल की जा रही है। अम्बाला के लगभग 250 निजी अस्पतालों में आज ओपीडी सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक बंद रही। सिटी व कैंट समेत अम्बाला के अन्य स्थानों पर ओपीडी संपूर्ण रूप से बंद रही। आईएमए का कहना है कि पिछले काफी समय से डॉक्टरों पर हमले होते रहे हैं। लगातार मांग की जाती रही कि डॉक्टरों को सुरक्षा प्रदान की जाए, लेकिन सरकार ने अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। कोरोना महामारी के समय डॉक्टरों पर जो हमले हुए हैं। उस समय केंद्रीय सरकार ने कानून में केवल थोड़ा सा बदलाव किया कर दिया। जो सिर्फ महामारी के दौरान लागू रहेगा।
ये हैं आईएमए की मांगें
आईएमए की मांग है कि केंद्रीय कानून बनाया जाए। जिसमें मरीज के तीमारदारों द्वारा डॉक्टरों पर हमले के बाद तुरंत केस दर्ज किया जाए। डॉक्टरों के प्रतिष्ठानों को सुरक्षित स्थान घोषित किया जाए। डॉक्टरों की सुरक्षा के मानक तय किए जाएं। डॉक्टरों पर हमले की जांच फास्ट ट्रैक कोर्ट से कराई जाए।