पंचायत व सहकारिता विभाग के गैरजिम्मेदार और भ्रष्ट अधिकारी बिगाड़ रहे प्रदेश सरकार की छवि
पंचायत व सहकारिता विभाग के गैरजिम्मेदार और भ्रष्ट अधिकारी बिगाड़ रहे प्रदेश सरकार की छवि
ग्राम सचिव फकीर चंद जैसे अधिकारियों के कारण सरकार और जनता में बढ़ रही दुरियां
( *राणा थंबड़ की कलम से* )
बराड़ा, (जयबीर राणा थंबड़)। देश और प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी द्वारा सत्ता संभालने से आमजन में एक विश्वास उत्पन्न हुआ था कि अब देश को भ्रष्टाचार से मुक्ति मिलेगी व गैरजिम्मेदार अधिकारियों पर नकेल कसी जाएगी। देश व प्रदेश में लगभग सात साल से सत्ता संभाल रही भारतीय जनता पार्टी ने कई विभागों में बहुत ही कड़े नियमों और निर्देशों से बिगड़ी हुई प्रशासनिक व्यवस्था को सुधारने, भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने और अधिकारियों को अनुशासित तरीके से काम करने में अपनी कर्त्तव्यपरायणता के उदाहरण प्रस्तुत किये हैं परन्तु भाजपा सरकार पंचायत विभाग और सहकारिता विभाग में पनपे भ्रष्टाचार और गैरजिम्मेदार अधिकारियों पर किसी भी तरह का अंकुश लगाने में विफल रही है, जिस कारण पंचायत अधिकारी, ग्राम सचिव व सहकारिता विभाग के उप रजिस्ट्रार व सहायक रजिस्टर एवं कर्मचारी अपनी मनमर्जी के मालिक हैं और सरकार के निर्देशों को ठेंगा दिखाते हुए जनता और सरकार के बीच दुरियां पैदा कर रहे हैं।


पाठकों की जानकारी के लिए बता दें कि प्रदेश का
पंचायत विभाग के अधिकारी और कर्मचारी कुछ भू-माफियाओं के साथ मिलकर पंचायती जमीनों, जोहड़ों और तालाबों पर कब्जा करा रहे हैं। यह सब मिलीभगत से हो रहा है। सभी अधिकारियों की अगर बात की जाए तो कुछ अधिकारी अपने कार्य के लिए कर्तव्यनिष्ठ हैं। यदि कुछ गांवों की बात करें जिनमें कभी भी और विशेषतः 7 साल में किसी भी प्रकार की ग्रामीण वासियों के द्वारा कोई समस्या सामने नहीं आई।जहांगीरपुर अंबाला जिला, अलीपुर पोंटी,सरदेहदी, मुलाना सहित कई गांव और है जिनके अधिकारी इन गांव में कार्य कर रहे हैं उन ग्राम वासियों को कभी किसी प्रकार की कोई भी समस्या का सामना नहीं करना पड़ा है। परन्तु ग्राम सचिव फकीर चंद जैसे बहुत से अधिकारी ऐसे हैं जिनकी मिलीभगत और संरक्षण से भू-माफिया पंचायती जमीनों, तालाबों और जोहड़ो पर अवैध कब्जे करके जनता के लिए परेशानियां पैदा कर रहे हैं।
जिन पर सरकार द्वारा नकेल कसी जानी चाहिए और ऐसे भ्रष्टाचारी अधिकारियों को विभाग बाहर का रास्ता दिखाए, तभी इनको आम पब्लिक की समस्या दिखेगी की आम पब्लिक किस प्रकार से इन समस्याओं से जूझ रही है। देश व‌ प्रदेश कोरोना महामारी से तो जुझ ही रहा है परन्तु जोहड़ो और तालाबों पर हो रहे अतिक्रमण के कारण गंदे पानी की निकासी नहीं होने से जनता आने वाली महामारी से जूझ रही है। 
देश एवं प्रदेश कोरोना  जैसी महामारी एवं ब्लैक फंगस, येलो फंगस जैसे वायरस से जूझ रहा है तो  पानी की निकासी के न होना से तालाबो पर भू माफियो का कब्जा करना एक बहुत ही बड़ी महामारी का रूप धारण करेगा जिसके लिए पंचायत विभाग स्वयं जिम्मेदार होगा। हरियाणा सरकार एवं केंद्र सरकार के द्वारा आम पब्लिक के लिए बहुत ही जनहित के कार्य किए जा रहे हैं मगर विभाग हर प्रकार की लापरवाही कर रहा है कुंभकरण की नींद सोया हुआ है। जब तक भ्रष्ट अधिकारियों को या इनके परिवार के सदस्यों को किसी बात का आभास नही होगा के आम पब्लिक कैसे असुविधाओं से जूझ रही है इनको क्या पता लगेगा ओर जब पता लगेगा या होगा तभी  कर्मचारी अधिकारी इन सभी बातों पर संज्ञान लेंगे मगर पंचायत विभाग के अधिकारी ग्राम सचिवों की मिलीभगत है ग्रामीण वासियों के द्वारा कर्मचारियों को  फोन के द्वारा भी सूचित किया गया मगर किसी भी प्रकार का कोई भी कार्य जनहित में नहीं हुआ। पंचायत विभाग ग्राम वासियों की समस्या के निदान के लिए बनाया गया  है मगर पंचायत विभाग जनहित के कार्य न करके आम पब्लिक के लिए परेशानियां पैदा कर रहा है।

पंचायत ऑफिसर गुरदास सिंह जैसे बहुत ही कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी भी हैं जो की आज ही समस्या का पता लगते ही गलियों एवं नालियों की सफाई के  कार्य में सफाई कर्मचारियों को लगाया एवं तलब से जलखुम्बी ओर उनकी नपाई के लिए भी बोला और भी सभी कार्य अपने से अच्छा करते हैं व पूरी मेहनत और ईमानदारी से कार्य करते हैं। पंचायत न होते हुए भी वह पूर्ण रुप से कार्य करते हैं और 
एस डी एम गिरीश चावल के द्वारा भी बहुत ही अच्छा निर्णय लिया गया तुरंत प्रभाव पानी निकासी के कार्य के आदेश जारी किए 
ग्राम सेक्टरी नेत्रपाल जी जिनके द्वारा ग्राम अलीपुर, पोंटी, मुलाना, सरदहरी आदि गांव में बहुत ही सराहनीय कार्य किए गए हैं। हमें इन जैसे अधिकारियों की आवश्यकता है। हमारी सरकार से मांग है कि ऐसे समर्पित अधिकारियों को उन गांव की जिम्मेवारी दी जाए जिन गांव में ग्रामीण वासियों के द्वारा पंचायत की जमीन पर अवैध निर्माण कब्जे किए हुए हैं। ऐसे अधिकारियों कर्मचारियों की आवश्यकता नहीं है जो मिलीभगत से भू माफियाओं के साथ मिलकर पंचायत की जमीन को दबाने का कार्य करते हैं, उन पर भवन निर्माण का कार्य करते हैं। विभाग में ऐसे अधिकारी भी हैं जो हमारे क्षेत्र को या अन्य किसी क्षेत्र को कोई आवश्यकता नहीं है वह भी सरकार के आदेशों को ठेंगा दिखाकर कार्य करते हैं। किसी भी कार्य को ईमानदारी ऑपरेशन से नहीं करते हैं व हर कार्य की अनदेखी करते हैं। आम पब्लिक इनके कार्य से बहुत ही परेशान है उसमें हमारे एरिया के जेई जैसे ग्राम सेकेट्री  भी शामिल हैं ऐसे कर्मचारियों को या तो विभाग से बाहर का रास्ता दिखाया जाए या इन अधिकारियों की अपने एरिया से बाहर तबादला किया जाए। होम डिस्ट्रिक्ट में न  रखते हुए उतरी हरियाणा की बजाय दक्षिण हरियाणा में ट्रांसफर पर भेजा जाए तभी हमारे एरिया के लोगों को सरकार की नीतियों का सही लाभ प्राप्त होगा।

दुसरी ओर सहकारिता विभाग का भी यही हाल है। सभी अफसर बेलगाम है। 2014 की अगर बात करें तो विभाग सहकारिता विभाग के रजिस्ट्रार महोदय के द्वारा पैक्सों में नौकरी को बैन किया गया था मगर उसके बावजूद भी पलवल जिले की अगर बात करें 60 कर्मचारियों को नौकरी दी गई। पेक्सो में बेन होने के बावजूद भी मगर विधानसभा में 2014 के सत्र में तत्कालीन विधायक सुभाष चौधरी द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से सवाल किया गया कि पेक्सो में नौकरी बेन होने के बावजूद भी किस प्रकार से 60 कर्मचारियों को नौकरी दी गई। इसके बाद विधानसभा में भूपेंद्र सिंह हुड्डा के द्वारा एक आदेश पारित किया गया जिसमें सभी 60 कर्मचारियों के पक्ष में यदि किसी को बाहर का रास्ता दिखाया गया और भाई अधिकारियों कोसीट करेगा जो इन कर्मचारियों की नियुक्ति में संलिप्त थे बता दें कि हरियाणा में सहकारिता विभाग में पेक्सो में 3 से 4 करोड़ रुपए के घाटे में चल रही  है मगर कर्मचारियों को धड़ाधड़ भर्तियां जारी हैं सब कर्मचारियों की।मिली भगत से जारी है
समिति के निदेशक मंडल एवं ग्रामीण वासियों के द्वारा यह भी बताया गया कि रजिस्ट्रार सहकारी समितियां हरियाणा भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी के द्वारा सन 2006 में एक आदेश परित किये  थे कि समिति में अगर किसी भी कर्मचारी की जरूरत है तो वह रजिस्ट्रार के कार्यालय से अनुमति ले   सकता है। उसके बाद 2012 में भी ऐसा ही हुआ अधिकारी इन कर्मचारियों को लगाने में लिप्त पाए गए थे। विधानसभा का यह फैसला भूपेंद्र सिंह हुड्डा की सरकार में लिया गया था जिसमें सुभाष चौधरी के द्वारा सरकार पर आरोप लगाया गया था कि  नौकरी को बैन करने के बावजूद भी पलवल जिला में 60 कर्मचारियों को कैसे लगाया गया तो भूपेंद्र सिंह हुड्डा मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री के द्वारा तुरंत प्रभाव से सभी 60 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया गया था व 22 कर्मचारियों को चार्ज सीट किया गया था।जो  इंसर्ट कर्मचारियों की नियुक्ति में संलिप्त है
2017 में रजिस्ट्रार महोदय के द्वारा आदेश किया गया किया गया जिसमें सहकारिता विभाग में 1 नए आदेश पारित किए गए जिसमें किसी भी कर्मचारी को नियुक्त लगाने से पहले या कोई भी वैकेंसी निकालने से पहले किसी भी न्यूज़ पेपर में दिया जाना अनिवार्य है।व अगर समिति को जरूरत है तो उसकी शिक्षा को भी ध्यान रखना पड़ेगा, मगर यहां पर किसी भी कर्मचारी को लगाते समय उनकी शिक्षा की ओर ध्यान नहीं दिया गया अगर प्रबंधक को लगाया जाए या किसी भी क्लर्क को प्रबंधक प्रमोट करना है। उसकी प्रमोशन करनी है तो उसका बीकॉम होना अनिवार्य है या सीधा प्रबंधक लगाना हो तो उसकी शिक्षा की भी कोई जांच नही की गई मगर उसको  लगाने के लिए बीकॉम होना अनिवार्य है, कंप्यूटर की नॉलेज होना अनिवार्य है। मगर यहां किसी भी कोई नियम उप नियम नहीं माना गया । करोड़ों रुपए के घाटे में समितियां चल रही है। करोड़ों रुपए के घाटे ऑडिट विभाग के द्वारा निकाले गए हैं मगर वहां पर फिर भी कर्मचारियों को लगातार भर्ती किए जा रहा है। पुराने कर्मचारियों को निकाला जा रहा है, नए कर्मचारियों को लगाया जा रहा है। यह सब मिलीभगत से हो रहा है। ग्रामीण वासियों का आरोप है की
सहकारिता विभाग के रवैया से ग्रामीण वासियों एवं समिति के निदेशक मंडल के सदस्यों में आक्रोश है। समलेहड़ी गांव वासियों एवं मीठापुर सहकारी समिति के निदेशक मंडल के सदस्यों के द्वारा कुछ समय पहले मुख्यमंत्री के द्वारा सीएम विंडो चलाई गई थी। ग्रामीण वासियों व समिति के निदेशक मंडल के सदस्यों के द्वारा सीएम विंडो मीठापुर समिति में लगे हुए कर्मचारियों के विरुद्ध एवं चरण सिंह प्रबंधक एवं केवल सिंह प्रबंधक के खिलाफ दी  गई थी। जिसमें प्रबंधकों के द्वारा सहकारिता विभाग के रूल नंबर 2 पारा 112 का स्पस्ट उल्लंघन करते हुए खून के रिश्ते में चरण सिंह के द्वारा अपनी धर्मपत्नी को समिति में नौकरी दी व केवल सिंह प्रबंधक के द्वारा खून के रिश्ते में अपने पुत्र को नौकरी दी। ग्रामीण वासियों का कहना है कि यह सहकारिता विभाग के नियम है उप नियम की सरासर अवहेलना है उनके द्वारा मुख्यमंत्री की सीएम विंडो पर शिकायत देने के बाद बावजूद भी सहकारिता विभाग के अफसरों की अफसरशाही इतनी हावी हो रही है कि अफसर तारीख की तिथि तो निर्धारित कर देते हैं मगर स्वयं उस दी हुई तारीख  पर न पहुंच कर कोई न कोई बहाना लगा देते हैं, जिसमें के बराड़ा सहकारिता विभाग के सहायक रजिस्ट्रार अंबाला अनू कौशिक उप रजिस्ट्रार इसके लिए स्वयं जिम्मेदार हैं। इन्हीं की मिलीभगत के द्वारा घाटे में चल रही समितियों में कर्मचारी धड़ाधड़ लगाए जा रहे हैं यह पैसे लेते हैं और कर्मचारियों को लगाया जाता है। हम अगर अपनी मीठापुर समिति की बात करें तो वर्ष 2019-20 में बैलेंस शीट के अनुसार तीन करोड़ कुछ लाख के नुकसान में समिति चल रही थी मगर उसके बाद भी कर्मचारियों को नियुक्ति दी गई व अपने हिसाब से अपना वेतन बढ़ाया गया है। 50,000 तक वेतन वहां पर कर्मचारी ले रहे हैं समिति घाटे में है। इसी प्रकार से अगर हम बात सारे अंबाले की करें तो मुलाना हल्के में समितियों में सबसे बड़ा गोलमाल हो रहा है। कर्म सिंह बिट्टू जहां जहां भी समिति के प्रबंधक रहे हैं वहां पर ही कर्मचारियों की भर्ती हुई है   अगर विभाग के द्वारा भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की एसआईटी बनाकर स्पेशल ऑडिट कराया जाए तो समिति में हो रहे भारी नुकसान का पता सामने आएगा‌। व सारी परतें खुलती नजर आएंगी, जिसमें सहकारिता विभाग के लेखापाल विभाग कर्मचारी एवं निरीक्षक सहायक रजिस्ट्रार सभी की मिलीभगत उजागर होगी और इस सहकारिता विभाग को लग रहे करोड़ों रुपए के चुने की परतें खुलती नजर आएगी।
जनता ने विनम्र प्रार्थना करते हुए कहा कि हम मीडिया में यह बयान देते हैं कि यह जो हमने बताया है यह सत्य है इसके लिए हम साक्ष्य भी सामने पेश करा सकते हैं। जो हमारे पास हैं इन्होंने कर्मचारियों को लगाते समय किसी भी सहकारिता नहीं उस नियम की कोई भी अनुपालन नहीं की है हरियाणा सरकार में सहकारिता विभाग के सभी नियमों को ठेंगा दिखाया है। यह सब सहकारिता विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की मिलीभगत का नतीजा है  पैक्स साहा प्रबंधक को सस्पेंड कर दिया गया है जो कर्मचारियों उन के द्वारा लगाए गए थे उनको बाहर का रास्ता दिखाया गया है। इसी तरह हमारी विभाग से और हरियाणा सरकार से मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर जी से गृहमंत्री से इस पेपर के माध्यम से प्रार्थना है कि इन सभी समितियों की उच्च स्तरीय जांच की जाए। एसआईटी बनाकर और जो भी कर्मचारी बैक डोर एंट्री से लगे हैं उनको बाहर का रास्ता दिखाया जाए और जो भी इनको लगाने में सम्मिलित  कर्मचारी समिति डायरेक्टर या अन्य उनको उनसे इनके वेतन की भरपाई की जाए।
ग्राम निवासी मीठा पुर निदेशक मंडल के सदस्य सुभाष राणा  शिकायतों पर शिकायतें करते रहते हैं परन्तु सहकारिता विभाग में लगे कर्मचारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।
सहकारिता विभाग में सहायक रजिस्ट्रार उप रजिस्ट्रार की मिलीभगत से कर्मचारियों को  लगाया जा रहा है  अगर बात किसी भी विभाग की करे तो   नोकरी देने से पहले  विभाग एवं हरियाणा सरकार के नियमों की पालना करना अनिवार्य होता है मगर सहकारिता विभाग की अगर बात करें तो सभी नियम में उक्त नियमों को कर्मचारियों अधिकारियों के द्वारा ठेका दिखाया गया है उनके आदेशों की अवहेलना की गई है अनदेखा किया गया है रूल नंबर 2 पारा 112 का तो स्पस्ट उलंग्न है सहकारी समिति पैक्स एवं सीएमएस में स्पष्ट उल्लंघन है ओर एरिया ऑपरेशन से बाहर के कर्मचारियों को नियुक्ति दी गई है घाटे होने के दौरान भी कर्मचारियों की मिलीभगत से आवश्यकता से अधिक कर्मचारियों को नियुक्ति दी गई है भाई भतीजावाद को बढ़ावा दिया है। जबकि भाजपा सरकार की एक नीति है कि भाई भतीजावाद को खत्म किया जाए।मगर सहकारिता  विभाग में समितियों एक्सो सीएमएस नौकरी देते समय भाई भतीजावाद की ओर ज्यादा बढ़ावा दिया गया है