गुड़मालानी विधायक का धरना दूसरे दिन भी जारी, धरनास्थल पर गुजारी रात नहीं हुई कंपनी और सरकार से कोई बात
*गुड़मालानी विधायक का धरना दूसरे दिन भी जारी, धरनास्थल पर गुजारी रात नहीं हुई कंपनी और सरकार से कोई बात*

बाड़मेर से वागाराम बोस की रिपोर्ट 


बाड़मेर@ गुड़ामालानी विधायक हेमाराम चौधरी का इस्तीफा रविवार को तीसरे दिन भी जारी है। हेमाराम दिन केयर्न वेदांता कंपनी के मेन गेट पर शनिवार को धरने पर बैठ गए थे। वे कंपनी के सीएसआर फंड आवंटन और स्थानीय युवाओं को रोजगार को लेकर धरना दे रहे हैं।
हेमाराम ने पांच दिन पहले विधायक पद से इस्तीफा दे दिया था। तभी से वे सुर्खियों में बने हुए हैं। हेमाराम केयर्न की रागेश्वरी गैस टर्मिनल (आरजीटी) के मुख्य गेट पर धरने पर बैठे हैं। सीएसआर फंड आवंटन और स्थानीय युवाओं को रोजगार को लेकर उन्हांने कंपनी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और जब तक मांगे नहीं मानी जाएंगी तब धरना जारी रहेगा। हेमाराम ने बीती रात धरना स्थल पर निकाली।
मंगलवार को इस्तीफा देने के बाद से वे अपने विधानसभा क्षेत्र के दौर पर थे। वहीं शनिवार को तेल उत्खनन करने वाली कंपनी पर आरोप लगाया कि सीएसआर के नाम पर गुड़ामालानी क्षेत्र के विकास के लिए खर्च नहीं किया है। इसके बाद आरजीटी के मुख्य गेट पर धरने पर बैठे गए। कुछ घंटों बाद गुड़ामालानी क्षेत्र के प्रधान और जनप्रतिनिधियों का भी विधायक को समर्थन मिला था।

*यह बोले विधायक हेमाराम*

हेमाराम ने कहा कि कोरोना की दूसरी लहर में संक्रमितों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है और मौतें भी हो रही हैं। इसको लेकर मैं केयर्न वेदांता कंपनी से लगातार मांग कर रहा था कि सीएसआर फंड का पैसा अस्पताल या उपकरण खरीदने में खर्च करें लेकिन कंपनी ने अब तक न तो पैसा खर्च किया और न ही कोई जवाब दिया। किसानों की हजारों बीघा जमीन ली। कंपनी को किसानों के लिए सीएसआर फंड से पैसा खर्च करना चाहिए। यह नियमों में भी हैं।
मैं विशेषकर दो मांगों को लेकर धरना दे रहा हूं। कंपनी के पास सीएसआर फंड की कमी नहीं है। कंपनी ने सीएसआर फंड का पैसा अगर खर्च किया है तो कहां किया है। कंपनी कह रही है कि हमने आरओ प्लांट लगाए हैं, लेकिन एक भी आरओ प्लांट सही नहीं हैं। किसानों को क्या फायदा हुआ।

*दो मांगें*

कोरोना से जैसी वैश्विक महामारी में जैसी जरूरत है इसके अनुसार सीएसआर फंड से क्षेत्र में अस्पताल या उपकरण के लिए खर्च करें। दूसरी मांग यहां के स्थानीय युवाओं को रोजगार दिया जाए। पिछले वर्ष स्थानीय लोगों और युवाओं ने रोजगार की मांग का लेकर धरना दिया था जो लंबे समय तक चला था। मैने धरना स्थल पर आकर धरणार्थियों और कंपनी के बीच समझौता करवाया था उस पर कंपनी ने कोई अमल नहीं किया।