अब आया दादी की इस लोरी का अर्थ समझ में -
अब आया दादी की इस लोरी का अर्थ समझ में -
1 कोंड़ी के रे कोंड़ी के----आज संसार की सारी दौलत कोंड़ी के बराबर हो गयी
2 - पान पसेरी के - पसेरी भर अनाज के बदले पान भी नसीब नहीं हो रहा
3 - उड़ गए तीतर बस गए मोर --अच्छे अच्छे लोग चले जा रहे हैैं यहाँ पर सिर्फ वो ही ज्यादा बच रहे हैं जो सिर्फ मोर की तरह देखने मे अच्छे हैं बाकी किसी काम के नहीं ।
4.सड़ी डुकरिया ले गए चोर - बूढ़े बुजुर्गों का सम्मान नहीं हो रहा
5. चोरों के घर खेती भई - चोरों की तो मानो लाटरी लगी है नकली दवाई नकली सामान बेच कर कमाई करने वालो की चाँदी है
6. मान डुकरिया मोटी भई - ऐसे लोग दिन दुने रात चौगुने बड़ रहे हैं जो दूसरों को लूट रहे हैं
7. मन मन पीसे मन मन खाय - गरीब मनुष्यों को पीस पीस कर मनुष्य ही धनार्जन करने में लगा है
8. बड़े गुरुर से जूजन जाय - ऐसे लोगों का जीवन आनंद से गुज़र रहा है जो सिर्फ धन को ही सर्वोपरि मानते हैं
9.पादियो ने छींकियो - गरीब को इतना खाने को ही नहीं मिलेगा कि पादने की नोबत आये और छींकने पर 14 दिन क्वारन्टीन कर दिया जाएगा
10.राजा की बरात आउत है - नेताओं की रैलियाँ फिर भी निकलेगी..........