जिले में लॉकडाउन सिर्फ पन्नों पर, लापरवाह लोगों पर करवाई करने के लिए प्रशासन लाचार, बेखौफ घूम फिर रहे हैं लोग
*जिले में लॉकडाउन सिर्फ पन्नों पर, लापरवाह लोगों पर करवाई करने के लिए प्रशासन लाचार, बेखौफ घूम फिर रहे हैं लोग*

रामानुजगंज :- कोरोना संक्रमण के बढ़ते ग्राफ और सैकड़ों की तादाद में पॉजिटिव पाए जाने के करण शहर एवं जिले में इससे कई मौत हो चुकी है। जिसमें अपने शहर की बात करें तो अधिकांश कम उम्र के युवा की मौत हुई है। जिससे पूरा शहर हतप्रभ है। जिले के कलेक्टर श्याम धावडे ने पिछले आदेश में 23 मई के रात्रि 12 बजे तक के आदेश होने के बाद संक्रमण और मौत की स्थिति को देखते हुए समझदारी से काम लेते हुए 31 मई रात्रि 12 बजे तक लॉकडाउन लगा दिया है।

अपने आदेश में 27 बिंदुओं को शक्ति से पालन कराना निर्देशित की गई है लेकिन ऐसा लगता है कि कोरोना को मात देने वाली यह लॉकडाउन सिर्फ कागज के पन्नों पर ही सिमट कर रह गया हो क्योंकि कुछ दिन तक इसका असर शहर एवं क्षेत्रों में देखा गया। लेकिन अब बेखौफ होकर शहर एवं गांव में पुलिसिंग नहीं होने से बिना सोशल डिस्टेंसिंग के आम आदमी घूम फिर रहे हैं ऐसा लग रहा है कि लापरवाह लोगों के सामने प्रशासन लाचार हो गई है। सुबह होते ही लोगों के भीड़ देखने को मिल जाता है लोग अपने अपने दुकानों के सामने खड़े दिखते हैं और जब कोई सामग्री खरीदने वाला आता है। तो बिना डर और भय के शटर उठाकर उन्हें सामग्री दे दी जाती है ऐसा नहीं है कि यह मात्र इक्का-दुक्का दुकानदारों के द्वारा ही की जा रही है। बल्कि शहर के तमाम दुकानों में ऐसी मंजर देखने को मिल सकती है।।

लापरवाह लोगो पर प्रशासन की दिख रही नरमी।
कोरोना के बढ़ते संक्रमण के कारण पूरे देश में हाहाकार मचा हुआ है। यदि हम पिछले वर्ष की बात करें तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा पूरे देश मे लॉकडाउन लागू किया गया था। जो लगभग पूरे देश मे सफल रही थी। जिसमें आम आदमी सड़क में कही घूम फिर भी नहीं सकते थे। यही नहीं शहर के सभी चौक पर पुलिस जवानों की तैनाती भी हुआ करती थी। परंतु इस बार तो अलग ही मंजर दिखाई देता है। ऐसा लगता है कि लॉकडाउन सिर्फ दिखावा बनकर रह गया है दुकानदार अपनी दुकानों के सामने ग्राहक के इंतजार में खड़े रहते हैं।

जैसे ही ग्राहक आते हैं तो शटर उठाकर सामग्री दे देते हैं। यही नहीं लोग बेखौफ होकर शहर में घूम फिर रहे हैं। यही नहीं बालक हाई स्कूल ग्राउंड में लगने वाली सब्जी मंडी में बेचने वाले एवं खरीदने वाले दोनों सोशल डिस्टेंस में नहीं रहते काफी भीड़ होती है। कड़ाई करने वाले प्रशासन आखिर क्यों लाचार बनी हुई है। यह लोगों के समझ के परे है। जिले के कलेक्टर श्याम धावडे ने लॉकडाउन इसलिए बढ़ाया है कि क्षेत्र में कोरोना की संक्रमण कम हो सके परंतु इनके मंशा के विपरीत कोई कार्यवाही नहीं किया जाना कहीं ना कहीं कोरोना को मात देने में हम सभी सफल नहीं हो पाएंगे। इस तरह तो कोरोना के चैन भी टूटना संभव नहीं है।

प्रतिबंध के बावजूद जिले में लगातार हो रही हैं शादी।
हालांकि कलेक्टर श्याम धावडे ने इस उद्देश्य से शादी करने पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दिया है। की शादी में काफी तादाद में लोग इकट्ठा होते हैं और संक्रमण फैलने का डर बना रहता है। परंतु ऐसा लगता है कि यह आदेश धरा का धरा है क्योंकि शहर एवं गांव में नहीं बल्कि बेफिक्र होकर लोग शादी कर रहे हैं। गांव तो छोड़िए शहर में भी बरात में बकायदा रात्रि के वक्त आतिशबाजी भी होती है। ऐसी स्थिति में प्रशासन की चुप्पी साधना कहीं ना कहीं कोरोना संक्रमण को बढ़ावा देना होगा।।

ठेला खोमचा वाले हो गए बेरोजगार।
शहर के चांदनी चौक के समीप चौपाटी एवं बस स्टैंड में शाम के वक्त लगाने वाले ठेला खोमचा बेरोजगार हो गए हैं यह लोग रोज कमाते हैं और अपने दो वक्त की रोटी खा पाते हैं ऐसी स्थिति में इनके द्वारा कहा जा रहा है कि यदि लॉकडाउन का पालन प्रशासन नहीं करा पा रही है तो हमें भी खोलें जाने की अनुमति दे दी जाए तमाम दुकानदार अपने दुकानों के सामने खड़े होकर बेखौफ होकर शटर उठाते हुए सामान बेच रहे हैं तो हम गरीब ठेला खोमचा वाले कहां जाएं हम ठेला खोमचा से प्रतिदिन कमाते हैं हैं और अपना पेट पालते हैं तो सबसे अधिक मार हमें ही क्यों पड़ रही है क्या सिर्फ पूरा नियम हम लोगों के लिए ही बनी हुई है प्रशासन लापरवाह लोगों के सामने लाचार क्यों है यह समझ के परे हैं।

*रामानुजगंज से सौरव कुमार चौबे की रिपोर्ट*