आरआई ने किया फसल गिरदावरी कार्य का मौके पर जाकर निरीक्षण
    हंडिया तहसील क्षेत्र के अंतर्गत पटवारियों द्वारा खेत-खेत जाकर फसल गिरदावरी का कार्य किया जा रहा है। गुरुवार को इस कार्य में प्रगति लाने हेतु हंडिया आरआई संतोष पथोरिया ने ग्राम मालपौन,पटवारी हल्का नम्बर 14 का दौरा कर ग्राम पटवारी द्वारा किये जा रहे फसल गिरदावरी कार्य का  स्थल निरीक्षण किया। साथ ही ग्राम पटवारी रमेश नाग को इस कार्य में प्रगति लाने हेतु निर्देशित किया गया। पथोरिया ने बताया कि आयुक्त भू-अभिलेख,ग्वालियर के आदेशानुसार उक्त कार्य 15 जनवरी 2021 तक अनिवार्य रूप है हर हाल में सौ फीसदी पूर्ण करना है। तथा अधीक्षक भू-अभिलेख,हरदा के निर्देशानुसार उक्त में सभी पटवारीगणों को प्रतिदिन अधिक से अधिक प्रगति लाने हेतु व प्रतिदिन की फसल गिरदावरी की प्रगति रिपोर्ट पटवारियों से प्राप्त कर प्रत्येक आरआई को अपने राजस्व निरीक्षक मंडल की जानकारी नियत प्रारूप में देने हेतु भी पाबंद किया गया है।
    फसल गिरदावरी क्या होती है?
               इस संबन्ध में आरआई पथोरिया ने बताया कि प्रत्येक पटवारी को ग्राम कोटवार के साथ मिलकर अपने प्रभार के ग्रामों में खेत-खेत जाकर प्रत्येक खेत मे बोई गई हर फसल को ऑन लाइन दर्ज करना होता है। जैसे मान लीजिए किसी पांच एकड़ के एक खेत में तीन एकड़ में गेंहूँ व डेढ़ एकड़ में चना व शेष रकबा में छोटे-छोटे रकबा में अन्य कोई फसल जैसे मटर,मसूर,चरी,सब्जी इत्यादि बोई है तो वह भी दर्ज करना होता है। साथ ही अगर कुछ रकबा पड़ती है तो उसकी भी इंट्री करना होता है एवं उस खेत मे कोई वृक्ष या कृषि सुधार व सिंचाई के साधन जैसे कुआँ, नलकूप,नहर,नदी से सिंचाई भी दर्ज करना होता है।फसल गिरदावरी के आधार पर ही समर्थन मूल्य पर खरीदी हेतु किसानों द्वारा अपनी फसल का विक्रय हेतु पंजीयन होता है। मतलब साफ है कि फसल गिरदावरी में आपके खेत में जो फसल की एंट्री हुई है उसी फसल का पंजीयन होगा। इसलिए अभी सही-सही फसल गिरदावरी होने से फसल पंजीयन(विक्रय) के समय किसानों को दिक्कत नहीं होती है।