भारत की अस्मिता और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है राममंदिर- खगेन्द्र भार्गव

 भारत की अस्मिता और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है राममंदिर- खगेन्द्र भार्गव



बैतूल/सारनी। कैलाश पाटिल 


श्री रामजन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के लिए विभिन्न संगठनों और व्यक्तियों द्वारा निधि समर्पण का सिलसिला जारी है। बुधवार को भारतीय कोयला मजदूर संघ पाथाखेड़ा क्षेत्रीय इकाई की ओर से क्षेत्रीय महामंत्री विजेंद्र सिंह एवं ओम प्रकाश शुक्ला ने 1 लाख और सप्रा फिलिंग सेंटर के संचालक अमित सप्रा ने 51 हजार रुपए का चेक खगेन्द्र भार्गव को सौंपा। इसी प्रकार काली माई व्यापारी संघ के सचिव देवेन्द्र सोनी ने 11 हजार रुपये का समर्पण किया। अयोध्या में बनने वाले श्रीराम मंदिर भारत की अस्मिता और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है। इस मंदिर के निर्माण में हिन्दू समाज के प्रत्येक व्यक्ति का समर्पण होना चाहिए। यह उद्गार विश्व हिंदू परिषद के प्रांत संगठन मंत्री खगेन्द्र भार्गव ने बुधवार को शोभापुर कालोनी एवं पाथाखेड़ा में श्री रामजन्मभूमि तीर्थ न्यास द्वारा आयोजित कार्यक्रम में व्यक्त किए। उपस्थित जन समुदाय को सम्बोधित करते हुए श्री भार्गव ने कहा कि पिछले पांच सौ वर्ष से अयोध्या में भगवान राम का मंदिर भूमि पर नही था लेकिन पीढ़ी दर पीढ़ी हमारे हृदय में विराजमान था।

श्री रामजन्मभूमि के लिए वर्षो तक हुए संघर्ष की याद दिलाते हुए श्री भार्गव ने कहा कि हजारों राम भक्तो के बलिदान के बाद यह शुभ घडी आई है। अब हमें बलिदान नही बल्कि मंदिर निर्माण के लिए धन और समय का समर्पण करना है। उन्होंने कहा कि राम जन्मभूमि का केस पहला ऐसा मामला था जिसे स्वयं रामलला ने लड़ा। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर पूरी दुनिया की निगाह थी। 5 अगस्त 2020 को जब मंदिर भूमिपूजन हुआ तो यह कार्यक्रम दुनिया मे सबसे अधिक देखा जाने वाला लाइव कार्यक्रम था। कभी राम को काल्पनिक मानने वाले आज अपना गोत्र ढूंढते फिर रहे हैं। यह हमारे संकल्प शक्ति की विजय है। आने वाले समय मे भारत समरस, समर्थ और समृद्ध होकर विश्व का जगत गुरु बनेगा।