नगर परिषद के पत्र को प्राथमिकता देकर शासन आदेश की निरंतर अवमानना कर रही हैं नगरपालिका सीएमओ :-
नगर परिषद के पत्र को प्राथमिकता देकर शासन आदेश की निरंतर अवमानना कर रही हैं नगरपालिका सीएमओ 

होशंगाबाद - मजदूर संघ के कार्यकारी अध्यक्ष ने बताया हैं कि मध्य प्रदेश राज्यपाल के नाम से शासन के उप सचिव ने स्थानांतरण नीति नियम के परिपालन में स्थानांतरण आदेश सात जनवरी में जारी किये थे जिसमे नगरपालिका होशंगाबाद में पदस्थ छै कर्मचारी/अधिकारी में से चार को दिनांक 13/01/2021में रिलीव कर दिया हैं लेकिन दो को रोक कर रखा हैं विश्वसनीय सूत्रो से ग्यात हुआ हैं होशंगाबाद नगरपालिका में पदस्थ लेखापाल जिनका स्थानांतरण नगर परिषद् देपालपुर जिला इंदौर में शासन आदेश के तहत किया गया हैं रिलीव होने के पहले ये नगर परिषद् देपालपुर के सीएमओ को पैसा खिलाकर वहां से शासन के विरूद्ध एक पत्र लिखवाकर ले आये हैं कि वहां पर लेखापाल का पद रिक्त नहीं हैं इसलिये इन्हें रिलीव न किया जावे जब भी इनके स्थानांतरण होशंगाबाद से हुये हैं हमेशा इनके द्वारा यही पैतरा बाजी अपनाकर नगरपालिका सीएमओ को गुमराह किया जाता हैं इसमे सवाल उठते हैं कि रिलीव होने के पहले स्थानांतरित नगर परिषद क्यों और किसके आदेश से गये नगरपालिका सीएमओ होशंगाबाद को नगर परिषद के पत्र को प्राथमिकता देना चाहिए या शासन के आदेश को क्या इसमे रिलीव न करते हुये भरपूर समय दिया जा रहा हैं और क्यों क्या नगरपालिका सीएमओ को भी लेखापाल के द्वारा रिलीव न करने को लेकर चढ़ावा दिया गया चार कर्मचारी/अधिकारी को रिलीव कर दो को जो रोका गया है उससे शहर में चर्चाओं का बाजार गरम हैं 
      संघ के अध्यक्ष राजेन्द्र उपाध्याय ने आगे बताया कि सहायक ग्रेड 3 पर पदस्थ कर्मचारी जब दैनिक वेतन पर थे तब अपनी ही निजी गल्ती से विकंलाग बने हैं वर्ष 2009 में यह नियमित हुये वर्ष 1990 से दैनिक वेतन व नियमितीकरण का कार्यकाल मिलाया जाये तो नगरपालिका होशंगाबाद में इनकी सेवा लगभग तीस वर्ष के आस पास एक ही स्थान पर बीत चुकी हैं सुनने में आया हैं कि नगरपालिका सीएमओ इनको विकंलागंता के नाम पर भरपूर सहयोग दे रही हैं कि यह कर्मचारी माननीय् न्यायालय से रिलीव न होने के स्टे-आर्डर ले आये जिससे इनको रिलीव नहीं किया जा सके जो कर्मचारी दैनिक वेतन पर विकंलाग होकर नियमितीकरण का लाभ लेकर विगत तीस वर्षो से अपनी सेवाये लगातार दे रहा हैं उसे अन्य शहर या स्थान पर पदस्थ होकर नौकरी करने में क्या परेशानी हो रही हैं 
       नगरपालिका होशंगाबाद में पदस्थ कर्मचारी/अधिकारी ने स्थानांतरण आदेश आने के बाद सीएल, ईएल, या मेडीकल अवकाश लेकर जोड तोड की राजनीति या अन्य प्रयास स्थानांतरण कैंसिल करवाने के किये हैं उन्होने राज्य शासन स्थानांतरण नीति आदेश के विरूद्ध जाकर अवमानना की हैं एवं कर्मचारी सेवा शर्त अधिनियम के विपरीत जाकर जो कार्य किया हैं वो निंदनीय हैं इनके साथ साथ नगरपालिका प्रशासक, सीएमओ भी दोषी हैं जो सात जनवरी से आज तक रिलीव न कर इनको अवसर पे अवसर दिये जा रहे हैं 
      मजदूर संघ मीडिया ( प्रेस) के माध्यम से माननीय् विधायक जी से निवेदन करता हैं कि स्थानांतरण के पूरे मामले को संग्यान में लेकर यह देखे कि स्थानांतरण आदेश आने के पश्चात कितने कर्मचारी/अधिकारी सीएल, ईएल, मेडीकल अवकाश पर किसकी स्वीकृति पर गये जिन्होंने मेडीकल अवकाश लिये उनकी सत्यता की जांच होना चाहिए छै कर्मचारियों के स्थानांतरण पर चार को रिलीव कर दो को रोककर किस कारण से रखा हैं नगरपालिका प्रशासन को लेखापाल के मामले में सख्त हिदायत के साथ स्थानांतरण नीति नियमावली आदेश के परिपालन में प्राथमिकता देकर अन्य दो कर्मचारियों को भी रिलीव किया जावे अगर लेखापाल के द्वारा नगर परिषद देपालपुर जिला इंदौर का पद रिक्त नही होने का कोई पत्र दिया हैं तो उसको अमल में न लाया जावे और आय से अधिक संपत्ति की जांच भी बैठाई जावे तभी भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी और भ्रष्ट कर्मचारियों को सबक मिलेगा