ठंड के सीजन मे ही पाताल मे जा रहा जल स्तर

 ठंड  के सीजन मे ही पाताल मे जा रहा जल स्तर

क्षैत्र के कई टयुवबेलो ने तोडा दम 


तो कुछ मे छोड पकड जारी

 गर्मी में हो सकते हैं हालात गंभीर

मसनगांव- जमीन मे पानी का जल स्तर लगातार निचे जा रहा है यह हालात  सर्दी के दिनों में बने हुए हैं तो आने वाले गर्मी के दिनों में हालात गंभीर हो सकते हैं। क्षेत्र में कई खेतों में रवि फसलों की बुवाई ट्यूबेल एवं नदी से होती है जहां नहर में पानी चलने के दौरान नदियों में भरपूर पानी होता है जिससे नदी के भरौसे रहने वाले किसानो को तो पर्याप्त पानी मिल जाएगा परंतु  टयुवबेल से खेती करने वाले किसानों के लिए खतरे की घंटी अभी से बजने लगी है।मसनगांव तथा आसपास के अनेक गांव मे जिन खेतो मे टयुवबेलो से खेती होती है वह किसान नहरो के उपर  निर्भर हो चुके हैं।किसानो का कहना है की पलेवे के पश्चात खेतों में पहले पानी देने के लिए जब मोटर चालू की गई तो अधिकांश खेतो  में जलस्तर नीचे पहुंच गया था जिसके कारण मोटर से पानी निकलना वंद हो गया वही कुछ टयुवबेलो से जो पानी आ रहा है वह खेतो को सिंचित करने के लिए  पर्याप्त नहीं जिसके कारण अधिकांश किसान नहर एवं नदी के भरोसे खेतों में पानी देने का प्रयास कर रहे हैं ग्राम के किसान मथुरादास फुलरे ने बताया कि उनके खेतों में लगे ट्यूबवेल से प्रतिवर्ष पूरी खेती सिंचित हो जाती थी परंतु इस वर्ष हालात गंभीर बने हुए हैं जिसके चलते चलते उन्हें नहर में पानी की तलाश करनी पड़ रही है इसी प्रकार आनंद पाटील संतोष छलौत्रे जितेंद्र रायखेरे आदि ने वताया की टेल क्षेत्र मे खेत होने के कारण नहर का पानी पहुंचने में परेशानी होती है जिसे देखते हुए उन्होंने अपने खेतों में ट्यूबवेल करा रखे हैं जिसमें अभी तक दोनो फसलों के लिए पर्याप्त पानी मिल जाता था परंतु इस वर्ष हालात अभी से खराब होने लगे हैं जिसके कारण रवी की फसलो मे ही पानी की पूतिॅ नही ही पा रही है तो आगामी मूंग की फसल की बुवाई संभव नहीं हो सकेगी।

 क्षेत्र के अधिकतर किसानों ने मूंग की तीसरी फसल बोने के लिए अपने खेतों में ट्यूबवेल करा रखे हैं जहां से बिजली की व्यवस्था भी बना ली गई है परंतु भू जलस्तर नीचे जाने से हालात चिंताजनक बनने के कारण अभी से किसानों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है किसानों का कहना है कि जब सर्दी के मौसम में क्षेत्र में नहर का पानी चल रहा है नदीयो मे भरपुर पानी के वाद जल स्तर निचे जा रहा है तब  गर्मी के दिनों में स्थिति भयानक हो सकती है।

वारिश का जल सहेजने के लिए नही है व्यवस्था

 ग्रामीण क्षेत्रों में बनाई जाने वाली सीसी सड़कें तथा पक्की नालिया एवं सीमेंट कंक्रीट से बनने वाले मकानों के बाद वरसाती जल को  सहेजने के लिए कोई व्यवस्था नहीं होने से बारिश का पानी नालियों से होकर नदियों में बह जाता है जिसके कारण भूजल स्तर ऊपर उठाने के लिए जो इंतजाम होना चाहिए वह नही दिखाई देते इसका परिणाम है की वारिश के तुर॔त वाद नदीयो मे पानी सुख जाता है वही कुंओ तथा टयुवबेलो का जल स्तर निचे चला जाता है।किसानो द्वारा फसलो की लालच मे अंधाधुंद टयुवबेल तो कराये जाते है पर मकान वनाने के दौरान रूफ हार्वेस्टिंग सिस्टम पर ध्यान नहीं दिया जाता जिसके कारण बरसात का जल सहेजने का प्रयास नहीं होता वही पंचायत स्तर पर भी इसकी व्यवस्था नहीं बनाई जाती जिससे बारिश के दिनों में गिरने वाला बरसात का पानी सीधा नदी नालो मे पंहुच जाता है और जमीन  रिचार्ज नहीं हो पाती

 मसनगांव से अनिल दीपावरे की रिपोर्ट