गेंहु की फसल मे समय से पहले आ गई वाली,उत्पादन को लेकर किसानो की चिंता वढी
गेंहु की फसल मे समय से पहले आ गई वाली,उत्पादन को लेकर किसानो की चिंता वढी 
मसनगांव- रवि सीजन की मुख्य फसल गेहूं में इस वर्ष असमय बाली आने से किसानों को उत्पादन की चिंता सताने लगी है क्षेत्र में गेहूं की फसल बुवाई से लेकर पकने तक 140 दिन का समय लगता है इसके पश्चात ही कटाई होती है परंतु इस वर्ष जिन किसानों ने अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में तथा नवंबर के पहले सप्ताह में बोनी कि उनके गेहूं में बालियां निकलने से उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका बनी हुई है किसानों का कहना है कि पोष के महीने में गेहूं की फसल में पोष वाल निकलते हैं लेकिन इस वर्ष आगहन माह  में ही कुछ प्रजाति के गेहूं की फसल मे  कहीं-कहीं पर बालियां दिखाई देने लगी है।वैसे इस समय कई खेतो मे दुसरा पानी चल रहा है इस दौरान गेंहु के पौधो मे कल्ले निकलने का समय रहता है परंतु अचानक से गेहूं का पौधे से तना बनकर बालियां निकलने लगी है जिससे किसान अचंभित बने हुए हैं यह स्थिति प्रायः सूखे क्षैत्र के खेतों में हर साल बनती है जहां पानी की कमी रहती है तथा जमीन भी हल्कि होती है वहां पर गेंहु जल्दी ग्रोथ कर पकने की स्थिति मे आ जात है और जल्दी बालिया  निकल कर तैयार फसल हो जाती हैं जिसका उत्पादन भी कम होता है परंतु इस वर्ष यह स्थिती क्षेत्र में देखने को मिल रही है जिससे उत्पादन घटने आशंका बनी हुई है। क्षेत्र में गेहूं की बुवाई  नवंबर माह में होती है लेकिन इस वर्ष मूंग की फसल होने के चक्कर में कई किसानों ने अक्टूबर में ही बोनी कर दी जिससे मौसम अनुकुल नही मिला,तापमान मे उतार चढाव के कारण अधिकांश समय गर्मी का मौसम बना रहा जिससे भी पौधों में कल्ले निकलने की बजाए तना बनकर गेहूं का पौधा तैयार हो गया किसानों का मानना है कि रवि फसलों के लिए ठंड का मौसम उपयुक्त होता है जो इस वर्ष देखने को नहीं मिला जिसका असर गेहूं की फसल पर अभी से दिखाई देने लगा है गेहूं के पौधे में कुंचा करने की अपेक्षा तना निकलकर बलिया आने लगी है जो उत्पादन को प्रभावित कर सकती है। ग्राम के कृषक बालक दास पाटिल ने बताया कि उन्होंने अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में अपने खेत में 322 प्रजाति का गेहूं लगाया था जिसमें दूसरा पानी होने के पहले ही बालियां निकलने लगी छोटी बाली निकलने से उत्पादन कम हो सकता है इसकी आशंका बनी हुई है वहीं कृषि वैज्ञानिक आरसी शर्मा ने बताया कि इस वर्ष किसानों द्वारा जल्दी गेहूं की बुवाई कर दी गई है मौसम अनुकूल नहीं होने से पौधों में बढ़वार नहीं हो पाई और बालियां समय से पहले निकल गई ठंडी आने पर स्वतः ही वालिया निकलना बंद हो जाएंगी और पौधा अच्छे से ग्रोथ कर लेगा रवि की फसलों के लिए ठंडी का मौसम अनुकूल होता है जो इस वर्ष देखने को नहीं मिला जिससे यह स्थिति बनी हुई है

किसानों ने लगाई है अलग अलग किस्म की प्रजातियां 
क्षेत्र में किसानों द्वारा गेहूं की अनेक प्रजातियां खेतों में लगाई गई है जिनमें मुख्य रुप से जी डब्ल्यू 322 ,273, तेजस, पूसा मंगल, 451,इनमे कुछ प्रजाती जल्दी पकने वाली है तो कुछ देर से पकती है मौसम फसलो के अनुकुल रहता है तो देरी से पकने पर सभी प्रजातियो का उत्पादन अच्छा मिलता है।लेकिन इस वर्ष जिस प्रकार मौसम में उतार-चढ़ाव बना हुआ है इसके असर से कुछ प्रजातियों में असमय बालियां निकलने लगी है जो अच्छे उत्पादन  के लिए उचित नही मानी जा रही है।
मसनगांव से अनिल दीपावरे