आजादी के 73 साल बाद भी नेताओं और अधिकारियों ने छुपा रखी थी

होशंगाबाद- आजादी के 73 साल बाद भी नेताओं और अधिकारियों ने छुपा रखी थी हमारे देश के दूसरे चेहरे की हकीकत, सड़क के किनारे फुटपाथ पर अपने परिवार के साथ रहने को मजबूर, क्या यही है हमारे देश का भविष्य हम कल तक चांद पर जाने की बात करते हैं लेकिन हम अपने देश के नागरिकों को उसका वास्तविक हक भी नहीं दे पा रहे हैं एक और मेट्रो ट्रेन चलाने का सपना देख रहे हैं वहीं दूसरी ओर जीवन की वास्तविक हकीकत को देखकर हम नहीं कह सकते कि हम किसी विकासशील देश से विकसित देश की श्रेणी में एक पहचान बना रहे हैं आखिर इन लोगों पर किसी की निगाह क्यों नहीं पड़ती या इन्हें शासकीय योजनाओं का लाभ भी क्यों नहीं मिलता क्या ये भारतीय नागरिक नहीं है, एक और सरकार नारा लगाकर बोलती है कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ और दूसरी हकीकत कुछ और है, रोड के किनारे अपना जीवन यापन कर परिवार चलाने वाले की 8 साल की बच्ची शिक्षा से क्यों वंचित है ऐसे कई परिवार आपको मिल जाएंगे, एवं शहर में रेन बसेरा तो बन गए हैं लेकिन वह सिर्फ दिखावे के लिए बने हैं वहां हमेशा ताले लगे रहते हैं इसी तरह तिलक भवन के बाजू में बना हुआ रेन बसेरा का उपयोग आज तक नहीं हुआ शासन का लाखों रुपए पानी में गया है इसका जिम्मेदार कौन, कहां गया मानव अधिकार आयोग की संवेदनाएं।                      प्रदीप गुप्ता की रिपोर्ट